Anti-Paper Leak Bill: 10 साल तक की जेल.. 10 करोड़ तक जुर्माना! एंटी पेपर लीक बिल को अब राज्यसभा ने भी दी मंजूरी, विपक्ष ने किया बहिर्गमन

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10 साल तक की जेल.. 10 करोड़ तक जुर्माना! एंटी पेपर लीक बिल को अब राज्यसभा ने भी दी मंजूरी, Rajya Sabha Approved Anti-Paper Leak Bill

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  • Publish Date - July 30, 2026 / 11:13 PM IST,
    Updated On - July 31, 2026 / 12:25 AM IST

नई दिल्ली। Anti-Paper Leak Bill: सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल पर रोक लगाने के उद्देश्य से लाए गए सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 को गुरुवार को राज्यसभा ने भी मंजूरी दे दी। इससे पहले यह विधेयक बुधवार को लोकसभा से पारित हो चुका था। अब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राज्यसभा में विधेयक पारित होने से पहले विपक्षी दलों के सांसद सदन से वॉकआउट कर गए।

Anti-Paper Leak Bill: विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पेपर लीक का मुद्दा देश के हर छात्र और हर परिवार से जुड़ा है। सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि नए कानून से देश के करीब 7.65 करोड़ छात्रों को लाभ मिलेगा। मंत्री ने बताया कि संशोधित कानून के तहत पेपर लीक और अन्य परीक्षा संबंधी अपराधों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होगी, जबकि आरोप पत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों में किया जाएगा। इसके लिए विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति का भी प्रावधान किया गया है।

सजा और जुर्माने में कई गुना बढ़ोतरी (Anti-Paper Leak Bill)

संशोधन विधेयक के तहत अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों के लिए न्यूनतम सजा तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी गई है, जिसे बढ़ाकर 10 वर्ष तक किया जा सकेगा। वहीं अधिकतम जुर्माना 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये कर दिया गया है। यदि किसी परीक्षा आयोजन से जुड़े सेवा प्रदाता की संलिप्तता पाई जाती है तो उस पर पांच करोड़ रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। साथ ही उसे सार्वजनिक परीक्षाओं के संचालन से चार वर्ष के बजाय आठ वर्ष तक के लिए प्रतिबंधित किया जा सकेगा। संगठित तरीके से परीक्षा संबंधी अपराध करने वालों के लिए न्यूनतम सजा पांच वर्ष से बढ़ाकर सात वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष तक करने का प्रावधान किया गया है। ऐसे मामलों में जुर्माना एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये तक लगाया जा सकेगा।

विशेष टास्क फोर्स और फास्ट ट्रैक कोर्ट बनेंगे

विधेयक के तहत केंद्र सरकार को पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अपराधों की जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स (एसटीएफ) गठित करने का अधिकार दिया गया है। साथ ही सत्र न्यायालयों को विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के रूप में नामित किया जाएगा, जहां इन मामलों की रोजाना सुनवाई होगी। डॉ. जितेंद्र सिंह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को शिक्षा व्यवस्था के लिए ‘गेम चेंजर’ बताते हुए कहा कि इस नीति ने विद्यार्थियों को अपनी रुचि के अनुसार विषय और करियर चुनने की स्वतंत्रता दी है। उन्होंने बताया कि देश में विश्वविद्यालयों की संख्या 760 से बढ़कर 1,293 हो गई है, जबकि 400 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं।

खरगे बोले- सिर्फ कॉस्मेटिक बदलाव

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने विधेयक का समर्थन करते हुए भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार ने केवल “कॉस्मेटिक बदलाव” किए हैं, जो पेपर लीक रोकने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने देश में राष्ट्रीय युवा रोजगार रणनीति, हर साल तय परीक्षा कैलेंडर, सरकारी विभागों में रिक्त पदों को भरने तथा परीक्षा संबंधी मामलों की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की। वहीं, एनसीपी सांसद प्रफुल्ल पटेल ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार और विपक्ष दोनों ही देश के युवाओं के भविष्य को लेकर समान रूप से चिंतित हैं और परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष एवं विश्वसनीय बनाना समय की आवश्यकता है।