रक्षा मंत्री डीआईबीईआर, डीएआरएल प्रयोगशालाओं को बंद करने की आशंकाएं दूर करें: अजय भट

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रक्षा मंत्री डीआईबीईआर, डीएआरएल प्रयोगशालाओं को बंद करने की आशंकाएं दूर करें: अजय भट

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  • Publish Date - March 26, 2026 / 07:26 PM IST,
    Updated On - March 26, 2026 / 07:26 PM IST

पिथौरागढ़, 26 मार्च (भाषा) नैनीताल के लोकसभा सदस्य अजय भट्ट ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से उत्तराखंड और खास तौर से अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों की यह आशंका दूर करने का अनुरोध किया है कि केंद्र सरकार हल्द्वानी में रक्षा जैव ऊर्जा अनुसंधान संस्थान (डीआईबीईआर) और भारत-चीन सीमा के अंदरूनी क्षेत्र में उससे संबंधित प्रयोगशालाओं को धीरे-धीरे बंद करने जा रही है।

पूर्व केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री भट्ट ने कहा कि इन रक्षा अनुसंधान कृषि प्रयोगशालाओं (डीएआरएल) में फिलहाल कुछ कर्मचारी ही बचे हैं।

उन्होंने बताया कि पिछले सप्ताह रक्षा मंत्री के हल्द्वानी भ्रमण के दौरान उन्होंने उन्हें इस संबंध में एक पत्र सौंपा है जिसमें उन्होंने कहा है कि डीआईबीईआर प्रयोगशालाओं को दिल्ली के तिमारपुर स्थित रक्षा शरीरक्रिया विज्ञान और संबद्ध विज्ञान संस्थान (डीआईपीएएस) से जोड़े जाने की चर्चाएं चल रही हैं और अगर ऐसा हुआ तो न केवल हिमालयी क्षेत्र के किसानों, स्थानीय बेरोजगार युवाओं और व्यापारियों के हित प्रभावित होंगे, बल्कि इससे क्षेत्र की शिक्षित प्रतिभाओं के इंटर्नशिप, जूनियर रिसर्च फैलोशिप एवं सीनियर रिसर्च फैलोशिप जैसे शैक्षणिक प्रयासों पर भी असर पड़ेगा।

भट्ट ने कहा, ‘‘डीएआरएल के स्थानांतरण से उच्च हिमालयी क्षेत्र के किसान उन बहुमूल्य कृषि सलाहों से वंचित हो जाएंगे जो उन्हें इन प्रयोगशालाओं में काम करने वाले वैज्ञानिकों से मिल रही हैं।’’

भट्ट के मुताबिक, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान (डीआरडीओ) के तहत स्थापित डीएआरएल के कई सेवानिवृत्त अधिकारियों से बातचीत करने के बाद उन्हें पता चला कि 1962 में चीन के साथ हुए युद्ध के बाद कृषि प्रयोगशालाओं की आवश्यकता महसूस की गई, ताकि सीमावर्ती क्षेत्र में अनाज और सब्जियों का उत्पादन बढ़ाया जा सके और वहां तैनात सैनिकों को खाद्य आपूर्ति के मामले में आत्मनिर्भर बनाया जा सके ।

नैनीताल के सांसद ने बताया कि डीएआरएल की प्रयोगशालाएं अल्मोड़ा, हल्द्वानी, पिथौरागढ़, औली और हर्षिल में हैं जहां स्थानीय भूभागों में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के तरीकों पर शोध कार्य चल रहा है।

पत्र में भट्ट ने सुझाव दिया कि इसकी बजाय तिमारपुर में स्थित डीआईपीएएस को पिथौरागढ़, औली और हर्षिल के भीतरी सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिए जिससे वह सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों की शरीरक्रिया का अध्ययन कर सके।

भाषा सं दीप्ति राजकुमार

राजकुमार