रवनीत बिट्टू ने ‘सतलुज’ पर प्रतिबंध का बचाव किया

रवनीत बिट्टू ने ‘सतलुज’ पर प्रतिबंध का बचाव किया

रवनीत बिट्टू ने ‘सतलुज’ पर प्रतिबंध का बचाव किया
Modified Date: July 13, 2026 / 10:09 pm IST
Published Date: July 13, 2026 10:09 pm IST

नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता रवनीत सिंह बिट्टू ने फिल्म ‘सतलुज’ पर लगी रोक का बचाव करते हुए सोमवार को कहा कि सरकार को जसवंत सिंह खालड़ा या उनकी विरासत से कोई आपत्ति नहीं है, बल्कि फिल्म में दिखाई गई तथ्यात्मक ‘‘विसंगतियों ’’ और ‘‘भ्रामक’’ चित्रण से आपत्ति है।

रेलवे और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री बिट्टू ने कहा कि ऐतिहासिक घटनाओं को संतुलित तरीके से पेश किया जाना चाहिए। उन्होंने फिल्म के कुछ पहलुओं पर सवाल उठाए, जिनमें ‘25,000’ लापता शवों के स्रोत और कुछ हस्तियों व घटनाओं के चित्रण शामिल हैं।

बिट्टू ने दावा किया कि उनकी आपत्तियां किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि आतंकवाद, हिंसा और खून-खराबे के खिलाफ हैं।

उन्होंने कहा कि सिख धर्म शांति, साहस, त्याग और मानवता की सेवा का प्रतीक है और आतंकवाद को सिख धर्म से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हिंदुओं और सिखों के बीच लंबे समय से गहरा रिश्ता रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में झूठी बातें फैलाकर दरार पैदा करने की बार-बार कोशिशें की जा रही हैं।

परमजीत कौर खालड़ा की ओर से खालड़ा की मौत की जांच की मांग पर बिट्टू ने कहा कि वह निर्दोष नागरिकों, बस यात्रियों और पुलिसकर्मियों की हत्याओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग का समर्थन करते हैं।

मानवाधिकार कार्यकर्ता खालड़ा की पत्नी परमजीत कौर खालड़ा ने सोमवार को अकाल तख्त से पंजाब में 80 और 90 के दशक में लापता हुए लोगों, अज्ञात शवों और कथित फर्जी पुलिस मुठभेड़ों में मारे गए लोगों की संख्या का पता लगाने के लिए ‘जन आयोग’ बनाने की मांग की।

बिट्टू ने अपने निजी अनुभवों का संदर्भ देते हुए कहा कि उनके दादा और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की 31 अगस्त, 1995 को हत्या कर दी गई थी। इसके बाद उन्होंने सितंबर 1995 में खालड़ा के लापता होने का जिक्र किया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उस दौर की हिंसा से दोनों परिवारों को नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वह खालड़ा की पत्नी से मिल सकते हैं।

बिट्टू ने कहा कि पीड़ितों के दुख का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए और बताया कि 1992 से 1995 के बीच खालड़ा ने हर संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल किया और उन्हें कभी नहीं रोका गया।

भाजपा नेता ने अकाल तख्त के जत्थेदार से अपील की है कि वे पंजाब में बरसों से चली आ रही हिंसा से प्रभावित लोगों के लिए प्रार्थना का आयोजन करें। अकाल तख्त का 14 जुलाई को अरदास आयोजित करने का कार्यकम है।

भाषा धीरज अविनाश

अविनाश


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