नयी दिल्ली, दो जुलाई (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने बृहस्पतिवार को कहा कि निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ ने पार्टी पर उसके दावे को लेकर उनकी बात ‘‘धैर्यपूर्वक सुनी’’। बागी गुट ने उम्मीद जताई कि आयोग जल्द ही इस पर कोई जवाब देगा।
इस बीच, ममता बनर्जी खेमे ने बागी गुट को मिलने का समय देने के आयोग के फैसले पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि यह बैठक आयोग की अपनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो निर्वाचन आयुक्तों से मुलाकात के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने 22 जून को कोलकाता में गुट के विशेष संगठनात्मक सत्र के बारे में जानकारी देने के बाद आयोग के सामने औपचारिक रूप से अपना पक्ष रखा।
ऋतब्रत ने कहा, ‘‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने 22 जून को कोलकाता में एक विशेष सत्र आयोजित किया। सत्र के तुरंत बाद, हमने निर्वाचन आयोग को लिखित रूप में इसकी औपचारिक सूचना दी। हमने कोलकाता में निर्वाचन कार्यालय के अधिकारियों से मुलाकात भी की और निर्वाचन आयोग से मिलने का समय मांगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम आभारी हैं कि आज पूर्ण पीठ – मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों – ने हमारी बात धैर्यपूर्वक सुनी। हमने अपनी बात रख दी है। हमें उम्मीद है कि आयोग जल्द ही हमें जवाब देगा।’’
ऋतब्रत बनर्जी ने आयोग को सौंपे गए दस्तावेज़ों का खुलासा करने से इनकार कर दिया, लेकिन जोर देकर कहा कि 22 जून को संगठनात्मक बैठक आयोजित करते समय उन्होंने सभी नियमों का पालन किया।
उन्होंने कहा, ‘‘असली तृणमूल कांग्रेस हम ही हैं। दो-तिहाई से ज्यादा विधायक हमारे साथ हैं। पार्षद भी हमारे साथ हैं।’’
आयोग के साथ हुई बैठक तृणमूल कांग्रेस पर नियंत्रण के लिए बढ़ती लड़ाई में एक नया घटनाक्रम है, जिसमें ऋतब्रत बनर्जी का बागी गुट पार्टी के संगठनात्मक और विधायी शाखा के तौर पर मान्यता चाहता है।
हालांकि, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने आयोग के सामने पार्टी का प्रतिनिधित्व करने के बागी गुट के अधिकार पर सवाल उठाए हैं। ममता खेमे का कहना है कि वे तृणमूल कांग्रेस के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता नहीं हैं।
ममता बनर्जी खेमे ने बागी गुट को मिलने का समय देने के आयोग के फैसले पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि यह बैठक आयोग की अपनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन है।
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सौगत रॉय और सागरिका घोष ने दावा किया कि किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता ही आयोग से मिलने का समय मांग सकते हैं और कहा कि पार्टी ने ऐसी किसी बैठक का अनुरोध नहीं किया था।
रॉय ने पूछा, ‘‘निर्वाचन आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को सूचित किया था कि केवल अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता ही बैठक का अनुरोध कर सकते हैं। तृणमूल कांग्रेस ने बैठक के लिए कोई अनुरोध नहीं किया था। तृणमूल द्वारा निष्कासित व्यक्ति को आयोग ने किस आधार पर मिलने का समय दिया?’’
घोष ने आरोप लगाया कि आयोग भाजपा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर काम कर रहा है।
राजनीतिक पार्टी और उसके विधायक दल के बीच अंतर बताते हुए घोष ने कहा कि विधायी शाखा संगठन की केवल एक शाखा है और वह विलय या विभाजन के बारे में फैसला नहीं ले सकती।
भाषा शफीक माधव
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