नयी दिल्ली, 10 मार्च (भाषा) दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के कला संकाय में नारी शक्ति वंदन अधिनियम (महिला आरक्षण अधिनियम) के समर्थन में एक हस्ताक्षर अभियान में भाग लिया, जहां उन्होंने शासन और नीति निर्माण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
इस अधिनियम पर गुप्ता ने कहा, ‘‘मैं अक्सर सोचती हूं कि हमें इस आरक्षण की आवश्यकता क्यों है। हर व्यक्ति, हर महिला, हर बेटी सामान्य तौर पर अपने दम पर इतनी दूर तक नहीं पहुंच सकती। लेकिन आज महिलाओं को इस देश को चलाने, प्रशासन और नीति निर्माण में कहीं अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।’
गुप्ता ने कहा कि सार्थक बदलाव तभी हासिल किया जा सकता है जब महिलाएं निर्णय लेने वाले पदों पर आसीन हों, जिससे वे उन मुद्दों का निदान कर सकें जो समाज, परिवारों और उनके अपने जीवन को सीधे प्रभावित करते हैं।
उन्होंने ‘लखपति बिटिया’ और ‘अनमोल’ योजनाओं जैसी दिल्ली सरकार की पहल पर प्रकाश डाला और उन्हें महिला सशक्तीकरण व सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से संवेदनशील तथा समावेशी नीति निर्माण का परिणाम बताया।
इस कार्यक्रम में महिलाओं के नेतृत्व और समान प्रतिनिधित्व को प्रमुखता से दर्शाया गया, साथ ही “महिलाओं के नेतृत्व का समय आ गया है” और “सशक्त महिलाएं, समृद्ध राष्ट्र” जैसे संदेश दिए गए।
गुप्ता ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि जब महिलाएं आगे आएंगी, विधायक, मंत्री और मुख्यमंत्री बनेंगी, तभी व्यवस्था में बदलाव लाना संभव होगा।’’
इस कानून को एक ऐतिहासिक कदम बताते हुए मुख्यमंत्री ने इसके पारित होने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि यह कानून ‘‘बेटी बचाओ’’ के उद्देश्य को ‘‘बेटी बढ़ाओ’’ की दिशा में आगे बढ़ाता है।
गुप्ता ने कहा कि महिलाओं के लिए अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग दशकों पुरानी है। उन्होंने कहा कि 2023 में बना यह कानून लंबे और निरंतर संघर्ष का परिणाम है, और अब इसका प्रभावी क्रियान्वयन हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने युवाओं से इस पहल का सक्रिय रूप से समर्थन करने और इसे एक जन आंदोलन में बदलने में मदद करने का आग्रह करते हुए कहा कि सच्ची लोकतांत्रिक शक्ति निर्णय लेने में समान भागीदारी में निहित है।
गुप्ता ने कानून के प्रभाव पर विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि यह देश में राजनीतिक प्रतिनिधित्व को फिर से परिभाषित करेगा तथा एक मजबूत, अधिक संतुलित व प्रगतिशील लोकतंत्र के निर्माण में मदद करेगा।
अभियान के बाद, गुप्ता ने परिसर में एक चाय की दुकान पर विद्यार्थियों और महिला संकाय सदस्यों के साथ बातचीत की, जहां मुख्यमंत्री ने उनके विचार, अनुभव और सुझाव सुने।
उन्होंने कहा कि जन प्रतिनिधियों और नागरिकों के बीच इस तरह का खुला और सीधा संवाद नीति निर्माण को अधिक प्रभावी व जन-केंद्रित बनाता है।
मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पोस्ट कर कहा, “इस हस्ताक्षर अभियान और महिला आरक्षण के लिए छात्राओं और परिसर में मौजूद महिलाओं का उत्साह अपने आप में एक संदेश है…16 अप्रैल को संसद में इस दिशा में आगे बढ़ते कदम, देश की करोड़ों माताओं, बहनों और बेटियों के सपनों, संघर्षों और आकांक्षाओं को नयी दिशा और नया विश्वास देंगे।”
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक तिहाई प्रतिनिधित्व की दिशा में उठाया गया यह कदम देश की बेटियों को नयी ताकत देगा।
भाषा
नोमान खारी
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