गणतंत्र दिवस : छत्तीसगढ़ की झांकी में आदिवासी नायकों की विरासत और डिजिटल संग्रहालय की झलक

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गणतंत्र दिवस : छत्तीसगढ़ की झांकी में आदिवासी नायकों की विरासत और डिजिटल संग्रहालय की झलक

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  • Publish Date - January 26, 2026 / 01:14 PM IST,
    Updated On - January 26, 2026 / 01:14 PM IST

नयी दिल्ली, 26 जनवरी (भाषा) गणतंत्र दिवस परेड में सोमवार को प्रदर्शित छत्तीसगढ़ की झांकी ने राज्य में स्थापित भारत के पहले डिजिटल संग्रहालय को प्रदर्शित किया, जो स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने वाले आदिवासी नायकों की विरासत को सम्मानित करता है।

झांकी के अग्रभाग में धुरवा समुदाय के प्रतिष्ठित नेता वीर गुंडाधुर की प्रतिमा थी, जो 1910 के भूमकल विद्रोह का प्रमुख चेहरा रहे। भूमकल का अर्थ अन्याय के खिलाफ सामूहिक सभा है। झांकी में विद्रोह के प्रतीक आम के पत्तों की टहनी और सूखी लाल मिर्च दिखाई गई, जो जन-आंदोलन और विरोध के प्रतीक हैं।

झांकी के पीछे शहीद वीर नारायण सिंह को दिखाया गया, जो घोड़े पर सवार और हाथ में तलवार लिए थे। बिंझवार जनजाति के नेता और सोनाखान के जमींदार, सिंह को 1856 में भीषण अकाल के दौरान गरीबों को अनाज वितरित करने के कारण गिरफ्तार किया गया था।

सोनाखान लौटने के बाद, सिंह ने 500 सैनिकों की सेना बनाई और 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। उन्हें 10 दिसंबर 1857 को रायपुर के जयस्तंभ चौक में फांसी दी गई थी। सिंह छत्तीसगढ़ के पहले शहीद के रूप में पूजनीय हैं।

‘स्वतंत्रता का मंत्र — वन्दे मातरम्’ थीम के तहत, छत्तीसगढ़ की झांकी ने आदिवासी नायकों की एकता और वीरता तथा ब्रिटिश शासन के खिलाफ उनकी अडिग लड़ाई को प्रदर्शित किया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले वर्ष नव रायपुर में स्थापित इस डिजिटल संग्रहालय का उद्घाटन किया था। संग्रहालय 14 प्रमुख आदिवासी विद्रोहों का डिजिटल रूप में संरक्षण कर रहा है और लंबे समय से मुख्यधारा की कहानियों में अनदेखे रहे प्रतिरोध के प्रभावशाली इतिहास को सामने ला रहा है।

भाषा

मनीषा अविनाश

अविनाश