केंद्रपाड़ा में 65 फुट ऊंचे रथ के निर्माण में आईआईटी भुवनेश्वर से सहयोग का अनुरोध

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केंद्रपाड़ा में 65 फुट ऊंचे रथ के निर्माण में आईआईटी भुवनेश्वर से सहयोग का अनुरोध

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  • Publish Date - July 7, 2026 / 09:32 PM IST,
    Updated On - July 7, 2026 / 09:32 PM IST

केंद्रपाड़ा, सात जुलाई (भाषा) ओडिशा के केंद्रपाड़ा में स्थित भगवान बलदेवजी मंदिर के पदाधिकारियों ने 16 जुलाई को होने वाली सालाना रथयात्रा के लिए 65 फुट ऊंचे लकड़ी के रथ के निर्माण और उसके सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भुवनेश्वर से मदद मांगी है।

अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल रथ यात्रा के दौरान 14 पहियों वाले रथ ‘ब्रह्मतालध्वज’ के चार पहिए खराब हो गए थे, जिससे भक्तों द्वारा खींचे जाते समय यह विशाल ढांचा एक तरफ झुक गया था। उक्त घटना को संज्ञान में लेते हुए शीर्ष संस्थान से सहायता मांगी गई है।

उन्होंने बताया कि आईआईटी भुवनेश्वर के यांत्रिकी विज्ञान स्कूल के अभियंताओं और शिक्षकों के मार्गदर्शन में रथ का निर्माण अब अपने अंतिम चरण में है।

अधिकारियों ने बताया कि हाल ही में विशेषज्ञों की एक टीम ने रथ निर्माण कार्य का निरीक्षण किया और रथ की संरचनात्मक स्थिरता को बेहतर बनाने के लिए कई उपाय सुझाए।

मंदिर के कार्यकारी अधिकारी बलभद्र पत्री ने कहा कि प्रशासन ने पिछले साल हुई घटना के बाद तकनीकी मदद लेने का फैसला किया। उन्होंने कहा, ‘‘हम इस साल रथ यात्रा के दौरान किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए हरसंभव सावधानी बरत रहे हैं।’’

आईआईटी, भुवनेश्वर के विशेषज्ञों ने निरीक्षण के दौरान बढ़इयों को सलाह दी कि वे जहां भी संभव हो, केवल नयी लकड़ी का इस्तेमाल करें। उन्होंने बताया कि पुरी के जगन्नाथ मंदिर के रथों के उलट, जिन्हें हर साल पूरी तरह से नयी लकड़ी से बनाया जाता है, बलदेवजी मंदिर में अच्छी गुणवत्ता की लकड़ी की कमी के कारण कुछ पुरानी लकड़ी का दोबारा इस्तेमाल किया जाता है।

विशेषज्ञों ने मुख्य मंदिर और मौसीमा मंदिर के बीच लगभग दो किलोमीटर लंबे रास्ते का भी निरीक्षण किया और पाया कि सड़क पर मौजूद ऊबड़-खाबड़ मोड़ विशाल रथ की सुचारू आवाजाही में बाधा डाल सकते हैं। उन्होंने उत्सव से पहले इस रास्ते की तत्काल मरम्मत करने का सुझाव दिया।

रथ के 14 पहियों में से 10 नए सिरे से बनाए जा रहे हैं, जबकि चार की मरम्मत की जा रही है, क्योंकि उचित लकड़ी कम मात्रा में उपलब्ध है। एक मई से लगभग 45 बढ़ई इसके निर्माण कार्य में लगे हुए हैं और मंदिर प्रशासन को भरोसा है कि रथ सालाना उत्सव से काफी पहले तैयार हो जाएगा।

भगवान बलदेवजी के इस मंदिर का निर्माण 1707 में इलाकों में मराठा सूबेदार के शासनकाल में कराया गया था।

भाषा धीरज सुरेश

सुरेश