कोलकाता, 19 जून (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने सरकारी आरजी कर अस्पताल में महिला चिकित्सक की दुष्कर्म के बाद हत्या मामले में सबूतों को मिटाने और दोषियों को बचाने की कोशिश के आरोपों को लेकर शुक्रवार को कोलकाता के दो पूर्व उप पुलिस आयुक्तों (डीसीपी) से पूछताछ की। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय एजेंसी ने कोलकाता पुलिस के पूर्व आयुक्त विनीत गोयल को भी अगले हफ्ते जांचकर्ताओं के सामने पेश होने को कहा है।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने मामले की जांच के शुरुआती चरण में कथित तौर पर लापरवाही बरतने के कारण भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को पिछले महीने निलंबित कर दिया था।
सीबीआई ने शुक्रवार को शहर के मध्य और उत्तरी क्षेत्र के पूर्व पुलिस उपायुक्तों क्रमश: इंदिरा मुखर्जी और अभिषेक गुप्ता से घंटों पूछताछ की और उनसे कई दस्तावेज एकत्र किए।
सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘निलंबित किए गए तीन आईपीएस अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में है। हमारे अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या सबूतों को मिटाने या मामले में शामिल अन्य संभावित आरोपियों को बचाने की कोई कोशिश की गई थी।’’
उन्होंने बताया, ‘‘अपराध की रात से लेकर पीड़ित के अंतिम संस्कार तक हुई घटनाओं की कड़ियों को जोड़ने के लिए विस्तृत जांच की जा रही है। उस दौरान लिए गए हर फैसले की समीक्षा की जा रही है।’’
अधिकारी ने कहा कि अगर कोई चूक, सबूत छिपाने या जांच को भटकाने की कोशिश पाई जाती है, तो उचित कार्रवाई की जाएगी
सीबीआई पहले ही पानीहाटी के पूर्व विधायक निर्मल घोष और महिला चिकित्सक का जिस श्मशान घाट में अंतिम संस्कार किया गया था उसके प्रभारी भोलानाथ पात्रा से पूछताछ कर चुकी है।
अधिकारी ने कहा, ‘‘हमारे जांचकर्ताओं ने अंतिम संस्कार से जुड़ी परिस्थितियों के बारे में जानकारी मांगी। श्मशान घाट के पदाधिकारियों का कहना है कि पीड़िता का अंतिम संस्कार उसके माता-पिता की सहमति से किया गया था।’’
आरजी कर चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल के सेमिनार हॉल में 8 अगस्त 2024 को रात्रि पाली के दौरान स्नातकोत्तर प्रशिक्षु चिकित्सक की कथित तौर पर दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। कोलकाता पुलिस ने इस अपराध के सिलसिले में नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को गिरफ्तार किया था।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बाद में मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। हालांकि, केंद्रीय जांच एजेंसी ने इस मामले में किसी और की गिरफ्तारी नहीं की। एक स्थानीय अदालत ने बाद में रॉय को दोषी करार देते हुए उसे उम्रकैद की सज़ा सुनाई।
पीड़ित के माता-पिता ने जांच पर असंतोष जताते हुए दावा किया कि इस अपराध में और भी लोग संलिप्त थे और इस घटना के पीछे की पूरी साज़िश का अब तक खुलासा नहीं हो पाया है।
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद, मामले की नए सिरे से जांच शुरू की गई। इसके बाद, गोयल, मुखर्जी और गुप्ता को निलंबित कर दिया गया।
सीबीआई के अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय जांच एजेंसी इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या उस समय वरिष्ठ नेताओं ने फोन कॉल या मैसेज के जरिए इन निलंबित अधिकारियों को कोई निर्देश दिए थे।
भाषा धीरज अविनाश
अविनाश