आरजी कर मामला: दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले की दोबारा जांच के लिए सीबीआई अस्पताल पहुंची

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आरजी कर मामला: दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले की दोबारा जांच के लिए सीबीआई अस्पताल पहुंची

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  • Publish Date - June 15, 2026 / 01:27 PM IST,
    Updated On - June 15, 2026 / 01:27 PM IST

कोलकाता, 15 जून (भाषा) पश्चिम बंगाल के कोलकाता में आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में वर्ष 2024 में दुष्कर्म के बाद प्रशिक्षु चिकित्सक की हत्या के मामले की जांच के सिलसिले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के अधिकारियों की एक टीम सोमवार को अस्पताल पहुंची।

एक अधिकारी के अनुसार, इस टीम में संयुक्त निदेशक स्तर के एक अधिकारी समेत कुल छह अधिकारी शामिल हैं।

अधिकारी ने बताया, “टीम अस्पताल के प्राचार्य, चिकित्सा अधीक्षक, उप-प्राचार्य और अन्य अधिकारियों से मुलाकात करेगी। साथ ही वे अस्पताल के उस स्थान का भी निरीक्षण कर सकते हैं, जहां यह अपराध हुआ था।”

अस्पताल परिसर में नौ अगस्त 2024 की रात महिला चिकित्सक की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद देशभर में चिकित्सकों और आम लोगों के बीच भारी आक्रोश फैल गया था।

घटना के तुरंत बाद सबूत नष्ट किए जाने और मामले को दबाने की कोशिश किए जाने के भी आरोप लगे थे।

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पिछले महीने इस मामले में सबूत नष्ट किए जाने के आरोपों और पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए विशेष आरोपों की नए सिरे से जांच के आदेश दिए थे।

अदालत ने सीबीआई को उस रात महिला चिकित्सक के रात का खाना खाने के समय से लेकर अगले दिन शाम को उनके अंतिम संस्कार तक हुई घटनाओं की पूरी श्रृंखला की दोबारा जांच करने का निर्देश दिया।

जांच एजेंसी को यह अधिकार दिया गया है कि वह जरूरत पड़ने पर किसी भी व्यक्ति से पूछताछ कर सकती है।

साथ ही, विशेष जांच दल (एसआईटी) पीड़ित परिवार द्वारा लगाए गए सभी विशेष आरोपों की गहन जांच करेगा।

अदालत ने एसआईटी को 25 जून को होने वाली अगली सुनवाई तक अपनी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त स्वास्थ्य मंत्री शरद्वत मुखर्जी ने पिछले सप्ताह कहा था कि राज्य सरकार ने आरजी कर मामले से संबंधित फाइलों को फिर से खोल दिया है।

मुखर्जी ने मामले की जांच और उसके संचालन में कथित कमियों को लेकर पीड़िता के माता-पिता की चिंताओं को समझने के लिए उनके साथ करीब डेढ़ घंटे तक बैठक की थी।

बीस जनवरी 2025 को इस मामले में दोषी ठहराए गए नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

भाषा जितेंद्र मनीषा

मनीषा