त्योहारों के दौरान स्टेशनों पर अधिक भीड़-भाड़ का अनुमान लगाने के लिए आरपीएफ डेटाबेस तैयार करेगा

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त्योहारों के दौरान स्टेशनों पर अधिक भीड़-भाड़ का अनुमान लगाने के लिए आरपीएफ डेटाबेस तैयार करेगा

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  • Publish Date - September 23, 2026 / 08:06 PM IST,
    Updated On - September 23, 2026 / 08:06 PM IST

नयी दिल्ली, 23 सितंबर (भाषा) रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) त्योहारों, धार्मिक कार्यक्रमों और बड़े सार्वजनिक समारोहों के दौरान विभिन्न स्टेशनों पर भीड़-भाड़ वाली स्थिति का 2022 से एक डेटाबेस तैयार करेगा, ताकि ऐसे मौकों पर अधिक भीड़ के कारण भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए समय रहते उपाय किये जा सकें।

इन उपायों में, स्टेशन पर समय पर कर्मियों को तैनात करना, यात्रियों की आवाजाही को नियंत्रित करना और राज्य पुलिस के साथ तालमेल बिठाना शामिल है।

भीड़-भाड़ वाले आयोजनों में त्योहार, धार्मिक समागम, मेले, परीक्षाएं, भर्ती अभियान, राजनीतिक कार्यक्रम, खेल-कूद के आयोजन, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम, बड़े सार्वजनिक समारोह और पर्यटकों के आगमन का महीना आदि शामिल हैं।

‘ज्यादा भीड़-भाड़ के लिए आरपीएफ का डीएस-12 ई-अनुमान रजिस्टर’ (ईएफआरआर) नाम की यह डिजिटल प्रणाली, अधिक भीड़-भाड़ वाले अवसरों के लिए पहले से अनुमान लगाने, निगरानी करने, उस समय तक की गई कार्रवाई और कार्यक्रम के बाद के मूल्यांकन के लिए एक ही डिजिटल भंडार के तौर पर काम करेगा।

आरपीएफ मुख्यालय ने 17 सितंबर 2026 को संबंधित वरिष्ठ जोनल सुरक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे ईएफआरआर को तत्काल प्रभाव से लागू करें और स्टेशनों पर अधिक भीड़ एकत्र होने की संभावना वाले आगामी त्योहारों/आयोजनों के लिए समय पर ‘डेटा एंट्री’ सुनिश्चित करें।

इस आदेश से पहले, आरपीएफ के महानिदेशक ने ईएफआरआर के सभी पहलुओं, इसके उद्देश्य और इसे लागू करने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताते हुए एक निर्देश जारी किया था।

इसमें कहा गया, ‘‘हाल ही में भीड़ से जुड़ी घटनाओं ने इस बात को रेखांकित किया है कि यात्रियों की अचानक बढ़ती संख्या का अनुमान लगाने और उन्हें संभालने के लिए एक व्यवस्थित, आधुनिक, आसूचना-आधारित और डेटा-संचालित प्रणाली अपनाने की जरूरत है।’’

निर्देश के अनुसार, ‘‘इसमें होली, दिवाली, छठ, क्रिसमस, बड़े धार्मिक त्योहारों और हर साल नियमित रूप से होने वाले अन्य आयोजनों के लिए एक समय-सीमा दी गई है, ताकि प्रणाली में इनकी जानकारी पहले से ही रेखांकित की जा सके और ‘‘बेहतर योजना बनाई जा सके, जो 60 दिन पहले भी की जा सकती है।’’

इसमें कहा गया है, ‘‘मेलों, खेल-कूद के कार्यक्रमों, परीक्षाओं, भर्ती परीक्षाओं, राजनीतिक रैलियों/सभाओं, स्थानीय त्योहारों, प्रदर्शनियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और इस तरह के अन्य आयोजनों के लिए, जिनकी सूचना आमतौर पर पहले ही मिल जाती है, आरपीएफ की संबंधित विशेष इकाई को हरसंभव कोशिश करनी चाहिए कि यथासंभव कम से कम तीन हफ्ते पहले जानकारी मिल जाए।’’

अधिकारियों ने कहा कि ईएफआरआर को भारतीय रेलवे में अधिक भीड़-भाड़ वाली स्थितियों का पहले से अंदाजा लगाने और उन्हें संभालने की आरपीएफ की क्षमता को मजबूत करने के लिए एक अहम संस्थागत तंत्र के तौर पर देखा जा रहा है।

भाषा

सुभाष सुरेश

सुरेश