भारत-रूस के बीच S-400 डिफेंस सिस्टम को लेकर करार,जानिए S-400 भारतीय सेना के लिए कितना खास है

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भारत-रूस के बीच S-400 डिफेंस सिस्टम को लेकर करार,जानिए S-400 भारतीय सेना के लिए कितना खास है

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  • Publish Date - October 6, 2018 / 03:33 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:54 PM IST

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के बीच एस-400 ट्रायंफ सिस्टम को खरीदने पर अंतिम मुहर लग गई। S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम को दुनिया में सबसे एडवांस माना जाता है। भारत को इस पर तकरीबन 5 अरब डॉलर यानी 40,000 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे। भारत इस मिसाइल डिफेंस सिस्टम की 5 रेजिमेंट्स की खरीद कर रहा है। यह देश की सबसे बड़ी डिफेंस डील्स में से एक होगी।

रूस पर प्रतिबंध लगाने संबंधी अमेरिकी काटसा कानून की संवेदनाओं को देखते हुए दोनों पक्षों ने इस बारे में हुए करार को मीडिया के सामने लाने से परहेज किया है। अमेरिका ने भी इस बात के संकेत दिए है कि वह इस करार को अ‍ड़यिल रवैया नहीं अपनाएगा।

s-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम है, जो दुश्मन के एयरक्राफ्ट को आसमान से गिरा सकता है। S-400 को रूस का सबसे अडवांस लॉन्ग रेंज सर्फेस-टु-एयर मिसाइल डिफेंस सिस्टम माना जाता है। यह दुश्मन के क्रूज, एयरक्राफ्ट और बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम है। यह सिस्टम रूस के ही S-300 का अपग्रेडेड वर्जन है। इस मिसाइल सिस्टम को अल्माज-आंते ने तैयार किया है, जो रूस में 2007 के बाद से ही सेवा में है। यह एक ही राउंड में 36 वार करने में सक्षम है। 

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एयर चीफ बीएस धनोआ की मानें तो S-400 भारतीय वायुसेना के लिए एक ‘बूस्टर शॉट’ जैसा होगा। भारत को पड़ोसी देशों के खतरे से निपटने के लिए इसकी खासी जरूरत है। पाकिस्तान के पास अपग्रेडेड एफ-16 से लैस 20 फाइटर स्क्वैड्रन्स हैं। इसके अलावा उसके पास चीन से मिले J-17 भी बड़ी संख्या में हैं। पड़ोसी देश और प्रतिद्वंद्वी चीन के पास 1,700 फाइटर है, जिनमें 800 4-जेनरेशन फाइटर भी शामिल हैं। 

नई दिल्ली। 400 किलोमीटर तक मार करने वाले इस सिस्टम को रूस ने 28 अप्रैल, 2007 को तैनात किया था। मौजूदा दौर का यह सबसे एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इजरायल और अमेरिका का मिसाइल डिफेंस सिस्टम भी मजबूत है, लेकिन उनके पास लॉन्ग रेंज की मिसाइलें हैं। इसकी बजाय रूस के पास कम दूरी में मजबूती से मार करने वाला मिसाइल डिफेंस सिस्टम है। यह एयरक्राफ्ट्स को मार गिराने में सक्षम है, जिसके जरिए अटैक का भारत पर खतरा रहता है। 

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इस डील के साथ दोनों नेताओं के बीच रूस में भारत की तरफ से नई तेल ब्‍लॉक खरीदने, साथ मिलकर नागरिक विमान बनाने, मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर शीघ्रता से सहमति बनाने, साथ मिल कर दूसरे देशों में कनेक्टिविटी परियोजनाओं को लागू करने जैसे अहम मुद्दों पर ठोस बात हुई। अगले पांच वर्षों का द्विपक्षीय सहयोग का एजेंडा बनाने की जिम्मेदारी दोनो देशों के विदेश मंत्रियों को सौंपा गया। साथ ही आठ समझौतों पर हस्ताक्षर भी हुए, जिसे सार्वजनिक किया गया। लेकिन दुनिया की सबसे आधुनिक वायु रक्षा प्रणाली एस-400 को लेकर हुए समझौते को सार्वजनिक नहीं किया गया है।

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सूत्रों के मुताबिक भारत को एस-400 ट्रायंफ सिस्टम की आपूर्ति दो वर्षो बाद शुरू हो जाएगी। भारत फिलहाल इसके पांच स्क्वाड्रन खरीदेगा। हर स्क्वाड्रन में दो मिसाइल सिस्टम होते हैं। इसकी लागत तकरीबन 39 हजार करोड़ रुपये आएगी। इसे देश के पांच अहम शहरों या रणनीतिक दृष्टिकोण से अहम माने जाने वाले इलाकों में तैनात किया जा सकता है।

यह पाकिस्तान और चीन की तमाम आधुनिक मिसाइलों को नष्ट कर सकता है। यह मिसाइलों को 600 किलोमीटर दूर ही पहचान लेता है और उन्हें लक्ष्य से पहुंचने से 60 किलोमीटर पहले नष्ट कर सकता है। यही नहीं, यह एक साथ 36 निशानें लगा सकता है। इस तरह से यह पूरे मिसाइल अटैक को निष्फल बनाने की क्षमता रखता है।

 

वेब डेस्क, IBC24