S Jaishankar News: कांग्रेस सरकार ने जिसे नकारा, उसे बिना चुनाव लड़े ही PM मोदी ने सौंप दी विश्व की बागडोर; जानें प्रेरक कहानी
S. Jaishankar News: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कभी न कोई चुनाव लड़ा, न किसी राजनीतिक परिवार से सत्ता की विरासत मिली, लेकिन फिर भी भारत की विदेश नीति की कमान उसी शख्स के हाथों में है जिसकी रणनीति और कूटनीतिक समझ की आज दुनिया कायल है।
S jaishankar News, image source: ANI
- जानें कौन हैं एस. जयशंकर?
- कांग्रेस दौर में नकारे गए जयशंकर?
- 2014 के बाद पीएम मोदी ने कैसे परखा?
- विदेश सचिव से विदेश मंत्री तक का सफर
S jaishankar News: भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर की कहानी सिर्फ एक नियुक्ति नहीं है, बल्कि एक कूटनीतिक काबिलियत की मिसाल पेश करने वाली कहानी है। खास बात यह है कि जिस नेता को कांग्रेस सरकार ने नजरअंदाज किया गया, उसे पीएम मोदी ने भारत की विदेश नीति की जिम्मेदारी सौंप दी। PM मोदी ने अपने तीसरे कार्यकाल में भी एस. जयशंकर को विदेश मंत्री बनाए रखा है।
S jaishankar Life Story: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कभी न कोई चुनाव लड़ा, न किसी राजनीतिक परिवार से सत्ता की विरासत मिली, लेकिन फिर भी भारत की विदेश नीति की कमान उसी शख्स के हाथों में है जिसकी रणनीति और कूटनीतिक समझ की आज दुनिया कायल है।
एस. जयशंकर की यह कहानी एक नियुक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि उस सोच का उदाहरण है जहां योग्यता, अनुभव और वैश्विक समझ को प्राथमिकता दी गई। (S jaishankar Life Story) एक समय जिस कांग्रेस नेतृत्व में उन्हें नजरअंदाज किया गया, उसी व्यक्ति को बाद में मोदी सरकार ने भारत की विदेश नीति का सबसे मजबूत स्तंभ बना दिया।
जानें कौन हैं एस. जयशंकर?
आपको बता दें कि 9 जनवरी 1955 को दिल्ली में जन्मे एस. जयशंकर को एक करियर डिप्लोमैट के तौर पर जाना जाता था। (S jaishankar Life Story) उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से राजनीति विज्ञान, अंतरराष्ट्रीय संबंध और न्यूक्लियर डिप्लोमेसी में एमए, एमफिल और पीएचडी की। आगे चलकर यही अकादमिक आधार उनकी कूटनीतिक ताकत बने।
1977 में इंडियन फॉरेन सर्विस (IFS) जॉइन करने के साथ ही जयशंकर ने आधिकारिक रूप से भारत की कूटनीति की दुनिया में कदम रखा। उनकी पहली विदेश पोस्टिंग 1979 से 1981 के बीच मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास में हुई, जहां उन्होंने तृतीय और द्वितीय सचिव के रूप में काम किया।
विदेश मंत्रालय और अहम वैश्विक जिम्मेदारियां
1981 से 1985 तक विदेश मंत्रालय में उन्होंने अमेरिका डेस्क और नीति नियोजन से जुड़े काम संभाला। इसके बाद वाशिंगटन डीसी, श्रीलंका , बुडापेस्ट, टोक्यो और प्राग जैसे अहम वैश्विक केंद्रों में उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया। हर पोस्टिंग में उनका फोकस भारत के रणनीतिक हितों को मजबूत करना रहा है।
2009 से 2013 तक चीन में भारत के राजदूत के रूप में कार्य करने के बाद एस. जयशंकर का कद और ऊंचा हो गया। 2013 में जब यूपीए 2.0 सरकार को नया विदेश सचिव चुनना था, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह उनके पक्ष में थे, लेकिन वरिष्ठता और राजनीतिक दखल के चलते यह फैसला उनके पक्ष में नहीं हो सका।

कांग्रेस दौर में नकारे गए जयशंकर?
मिली जानकारी के अनुसार उस समय चर्चा रही कि संगठनात्मक दबाव के चलते सुजाता सिंह को विदेश सचिव बनाया गया था। कई रिपोर्ट्स में यह भी उल्लेख हुआ कि गांधी परिवार के करीबी संबंधों के कारण ऐसा फैसला लिया गया। परिणाम स्वरूप एस. जयशंकर को अमेरिका का राजदूत बनाकर भेज दिया गया। जबकि विदेश सचिव की कुर्सी उनसे दूर रह गई।
2014 के बाद पीएम मोदी ने कैसे परखा?
2014 में सत्ता बदलने के साथ हालात भी बदल गए। 2015 में मोदी सरकार ने सुजाता सिंह को समय से पहले पद से हटाकर एस. जयशंकर को विदेश सचिव बना दिया। (S jaishankar Life Story) दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली अमेरिकी यात्रा के दौरान जयशंकर ने अपने रोल से उन्हे खासा प्रभावित किया था।
विदेश सचिव से विदेश मंत्री तक का सफर
2018 तक विदेश सचिव रहने के बाद 2019 में एस. जयशंकर को सीधे विदेश मंत्री बनाया गया। दिलचस्प तथ्य यह रहा कि शपथ ग्रहण के समय उनके सामने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बैठे थे। जो कभी उन्हें विदेश सचिव बनाना चाहते थे, लेकिन कथित तौर पर दबाव बस ऐसा कर नहीं सके।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने तीसरे कार्यकाल में भी एस. जयशंकर को विदेश मंत्री बनाया। (S jaishankar Life Story) यह फैसला पिछले पांच वर्षों में भारत की बदली हुई विदेश नीति, मजबूत वैश्विक छवि और स्पष्ट कूटनीतिक रुख का संकेत माना जाता है। एस. जयशंकर का सफर इस बात को साबित करता है कि भारतीय राजनीति और प्रशासन में कभी-कभी योग्यता को सही मंच मिलने में समय लगता है, लेकिन जब मिलता है, तो इसका असर पूरी दुनिया देखती है।
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