जयपुर, 11 जून (भाषा) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बृहस्पतिवार को कहा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट उनके लिए ‘बेटे’ जैसे हैं।
गहलोत ने कहा कि पायलट के साथ अपने रिश्ते को लेकर उन्होंने जो कुछ कहा था, वह पूरी तरह दिल से कहा था।
यहां अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में गहलोत ने कहा कि पायलट का यह कहना बिल्कुल सही है कि वह (गहलोत) उन्हें अपने पुत्र वैभव गहलोत की तरह मानते हैं और इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
इससे पहले, गहलोत के हालिया बयानों के बारे में पूछे जाने पर सचिन पायलट ने कहा था, ‘‘उन्होंने (गहलोत ने) बड़े प्रेम से कहा कि जैसा स्नेह और लगाव उनका अपने पुत्र वैभव गहलोत के साथ है, वैसा ही स्नेह और लगाव मेरे साथ भी है।’
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए गहलोत ने कहा, ‘‘उन्होंने सही कहा है। इसमें गलत क्या है? मैं तो यह बात पहले ही कह चुका हूं। वह दो-तीन दिन बाद कह रहे हैं। हम बेहद कम उम्र से एक-दूसरे के घर आते-जाते थे और दोनों (सचिन पायलट और वैभव गहलोत) बच्चों की तरह ही थे। उन्होंने कोई गलत बात नहीं कही है।’’
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘मैंने जो कुछ कहा है, वह दिल से कहा है। मैंने उस दिन किसी पर कोई आरोप नहीं लगाया था।’
गहलोत ने कहा कि उनकी हालिया सार्वजनिक टिप्पणियों का मकसद देश के सामने वास्तविक तथ्य रखना था, क्योंकि यह धारणा बन गई थी कि उन्होंने मुख्यमंत्री बने रहने के लिए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद ठुकरा दिया था।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने अपने मन की बात कही और हर तथ्य को सामने रखा। यदि किसी को लगता है कि उसमें कोई तथ्यात्मक गलती है, तो वह मुझसे इस बारे में बात कर सकता है।’
उन्होंने कांग्रेस नेताओं से पुराने मतभेद ‘‘भुलाकर और माफ कर’’ पार्टी के हित में एकजुट होकर काम करने की अपील की।
गहलोत ने कोटा और बीकानेर में प्रसव के दौरान या उसके बाद महिलाओं की मौत की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्य सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि संस्थागत प्रसव की उच्च दर के बावजूद ऐसी घटनाओं ने महिलाओं में भय का माहौल पैदा कर दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए। जल्द से जल्द जांच कराई जाए, पीड़ित परिवारों को राहत दी जाए और प्रदेश की महिलाओं को भरोसा दिलाया जाए कि जो भी कमियां हैं, उन्हें दूर किया जा रहा है तथा भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होंगी।’’
मध्यप्रदेश में कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन खारिज होने के मुद्दे पर गहलोत ने आरोप लगाया कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाएं दबाव में काम कर रही हैं।
उन्होंने चुनावी प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि मतदाता सूची में हेरफेर की कोशिशें की जा रही हैं।
गहलोत ने कहा, ‘‘ऐसी हरकतें लोकतंत्र के भविष्य को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करती हैं।’’
शिवसेना (उबाठा) नेता संजय राउत के उस सुझाव का समर्थन करते हुए कि कांग्रेस से अलग हुई पार्टियों को फिर से एक मंच पर आना चाहिए, गहलोत ने कहा कि इस विचार में दम है।
उन्होंने ‘‘लोकतंत्र की रक्षा’’ के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी एकता का आह्वान किया और कहा कि स्पष्ट नेतृत्व का संदेश मतदाताओं पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
गहलोत ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल के प्रचार अभियानों की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पूर्व नेताओं के योगदान को कमतर दिखाने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने राहुल गांधी की प्रशंसा की और उन्हें ‘‘ईमानदार, निष्ठावान और गरीबों तथा देशवासियों के प्रति समर्पित नेता’’ बताया।
गहलोत ने कहा कि उनके नेतृत्व को तेजी से स्वीकार्यता मिल रही है।
राजस्थान के मंत्री किरोड़ी लाल मीणा द्वारा की जा रही छापेमारी की कार्रवाई पर गहलोत ने सवाल उठाते हुए इसे अनुचित बताया।
उन्होंने कहा, ‘‘छापेमारी का काम अधिकारियों को करना चाहिए। मंत्रियों की भूमिका निगरानी रखने और कार्रवाई सुनिश्चित करने की होती है। किसी मंत्री का व्यक्तिगत रूप से ऐसी कार्रवाई में शामिल होना उचित नहीं है, क्योंकि इससे अवांछित परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।’’
भाषा पृथ्वी खारी
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