सनातन धर्म विभाजनकारी है, इसे ‘समाप्त’ किया जाना चाहिए: उदयनिधि

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सनातन धर्म विभाजनकारी है, इसे ‘समाप्त’ किया जाना चाहिए: उदयनिधि

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  • Publish Date - May 12, 2026 / 02:31 PM IST,
    Updated On - May 12, 2026 / 02:31 PM IST

चेन्नई, 12 मई (भाषा) द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) नेता उदयनिधि स्टालिन ने मंगलवार को दावा किया कि सनातन धर्म लोगों को विभाजित करता है और उन्होंने इसे ‘समाप्त’ करने का आह्वान किया।

उदयनिधि इससे पहले सितंबर 2023 में भी इस तरह का बयान दे चुके हैं।

तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में अपने पहले भाषण में द्रमुक नेता ने यह भी कहा कि विपक्ष, तमिल प्रार्थना गीत ‘‘तमिल थाई वझुथु’’ को दरकिनार करने के किसी भी प्रयास को सफल नहीं होने देगा।

उन्होंने सदन में अपने भाषण में कहा, ‘‘सनातन धर्म लोगों को विभाजित करता है और उसे निश्चित रूप से समाप्त किया जाना चाहिए।’’

इससे पहले उदयनिधि ने 2023 में भी इसी तरह की टिप्पणी की थी जिससे एक बड़ा विवाद पैदा हो गया था। उन्हें हिंदू समर्थक संगठनों की आलोचना का शिकार होना पड़ा और उनके खिलाफ कई मामले भी दर्ज कराए गए थे।

उदयनिधि ने नयी सरकार के हालिया शपथ ग्रहण समारोह के संबंध में एक विशिष्ट शिकायत को उजागर करते हुए कहा कि राज्य के गीत को उसकी पारंपरिक प्राथमिकता के बजाय क्रम में तीसरे स्थान पर धकेल दिया गया।

विपक्ष के नेता ने कहा, ‘‘…आपकी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान हुई ऐसी घटना एक गलती थी और आपको इस विधानसभा में इसे दोबारा होने नहीं देना चाहिए। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।’’

उन्होंने कहा कि न केवल विधानसभा में, बल्कि किसी भी सरकारी कार्यक्रम या तमिलनाडु में आयोजित किसी भी कार्यक्रम में, ‘तमिल थाई वझथु’ को हमेशा प्रथम स्थान दिया जाना चाहिए।

विपक्ष के नेता ने कहा, ‘‘मैं इस सरकार से अनुरोध करता हूं कि यह सुनिश्चित किया जाए कि इस पर कभी समझौता न हो। हमें अपने अधिकारों और परंपराओं की रक्षा के लिए बहुत सतर्क रहना होगा।’’

उन्होंने दावा किया कि इस परंपरा से हटने से राज्य के लोगों में काफी आक्रोश है और उन्हें सदमा लगा है।

उन्होंने सदन को 2023 की उस घटना की भी याद दिलाई, जब सरकार ने राज्यपाल द्वारा प्रोटोकॉल में बदलाव करने के प्रयासों का विरोध किया था।

द्रविड़ मॉडल के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए, उन्होंने कहा कि विपक्ष सरकार के प्रदर्शन पर नजर रखता रहेगा ताकि ‘‘सब के लिए सब कुछ’’ के सिद्धांत को बरकरार रखा जाए।

भाषा शोभना वैभव

वैभव