सनातन शाश्वत है, उदयनिधि के चाहने से यह समाप्त नहीं होगा: होसबाले

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सनातन शाश्वत है, उदयनिधि के चाहने से यह समाप्त नहीं होगा: होसबाले

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  • Publish Date - May 12, 2026 / 09:03 PM IST,
    Updated On - May 12, 2026 / 09:03 PM IST

(विजय जोशी)

नयी दिल्ली, 12 मई (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह (महासचिव) दत्तात्रेय होसबाले ने मंगलवार को द्रमुक नेता उदयनिधि स्टालिन पर निशाना साधते हुए सनातन धर्म की तुलना वट वृक्ष से की और कहा कि उनके चाहने से यह समाप्त नहीं हो जायेगा।

होसबाले ने ‘पीटीआई वीडियो’ के साथ एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘सिर्फ इसलिए कि मुझे लगता है कि प्रकाश नहीं होना चाहिए या मुझे लगता है कि परछाईं नहीं होनी चाहिए, इसका मतलब यह नहीं है कि ये गायब हो जाएंगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सनातन इस राष्ट्र की आत्मा और चेतना है। यह कोई धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि एक मूल्य और एक वैश्विक दृष्टि है।’’

होसबाले से मंगलवार को तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में उदयनिधि के पहले भाषण के बारे में सवाल किया गया, जिसमें उन्होंने सनातन धर्म को समाप्त करने का आह्वान किया था।

उदयनिधि इससे पहले भी इस तरह का बयान दे चुके हैं।

आरएसएस नेता ने कहा, ‘‘यह उनकी राय है और लोगों ने चुनावों में इसका जवाब दिया है। लेकिन, केवल किसी के कह देने से ही सनातन समाप्त नहीं हो जायेगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सनातन शाश्वत रूप से विद्यमान है। शाश्वतता ही सनातन है। यह एक वृक्ष की तरह है, एक वट वृक्ष की तरह। 100 या 200 साल बाद भी वट वृक्ष वहीं खड़ा रहता है।’’

होसबाले ने कहा कि यह पुराना हो सकता है, क्योंकि इसका तना पुराना है, लेकिन हर मौसम में इसमें नए पत्ते और फूल आते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘तो यह वृक्ष ताजा है, सदा ताजा। सनातन वही है। यह ‘नित्य नूतन और चिर पुरातन’ है। तो यह एक अद्भुत संयोजन है। यही हमारी सभ्यता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी सभ्यता की यादें हजारों साल पुरानी हैं, सहस्राब्दियों पुरानी हैं। सभ्यता की यादें। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और अन्य तकनीकी प्रगति जैसी आधुनिकता को स्वीकार नहीं करते या उसका स्वागत नहीं करते।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम नयी तकनीक का स्वागत करते हैं, हम उसे अपनाते हैं, हम उसका आनंद लेते हैं, हम उसका जश्न मनाते हैं।’’

उदयनिधि के बारे में उन्होंने कहा, ‘‘एक तरह से, यह सज्जन भी सनातन का पालन कर रहे हैं, लेकिन शायद वह सोचते हैं कि सनातन केवल उच्च जाति से जुड़ा हुआ है।’’

भाषा

देवेंद्र अविनाश

अविनाश