मदुरै, दो अप्रैल (भाषा) तमिलनाडु की एक जिला अदालत ने साल 2020 में सथानकुलम में एक पिता-पुत्र की हिरासत में मौत से जुड़े सनसनीखेज मामले में दोषी ठहराए गए नौ पुलिसकर्मियों की सजा का एलान बृहस्पतिवार को छह अप्रैल तक के लिए टाल दिया।
मदुरै प्रथम अतिरिक्त जिला अदालत के न्यायाधीश मुथुकुमारन ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने तथा पीड़ितों के परिजनों की ओर से की गई भावुक अपीलों पर गौर करने के बाद सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया।
मामले में दोषी ठहराए गए पुलिस निरीक्षक श्रीधर, उपनिरीक्षक बालकृष्णन और रघु गणेश तथा कॉन्स्टेबल मुरुगन, समादुरई, मुथुराजा, चेल्लादुरई, थॉमस फ्रांसिस और वेइलुमुथु को कड़ी सुरक्षा के बीच न्यायाधीश के सामने पेश किया गया।
सीबीआई की ओर से पेश वकील ने व्यापारी पी जयराज और उनके बेटे जे बेनिक्स की हिरासत में कठोर यातनाएं दिए जाने के बाद हुई मौत के मामले को “दुर्लभतम” बताते हुए दोषी पुलिसकर्मियों को मृत्युदंड या पैरोल की संभावना के बिना उम्रकैद की सजा देने का अनुरोध किया।
अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि तीन प्रत्यक्षदर्शी गवाहों की गवाही से समर्थित अपराध की भयावह प्रकृति ने समाज की सामूहिक चेतना को झकझोर दिया।
सीबीआई ने मामले में मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन को रेखांकित करते हुए कहा कि पीड़ितों को हथियारों से बेरहमी से पीटा गया था, जिसके लिए दोषियों को कठोर से कठोर सजा दी जानी चाहिए।
जयराज और बेनिक्स को कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए लागू लॉकडाउन के दौरान प्रतिबंधों का उल्लंघन करने के आरोप में 19 जून 2020 को थूथुकुडी जिले के साथनकुलम शहर की पुलिस ने हिरासत में लिया था। दोनों की पुलिस हिरासत में दी गई यातनाओं के कारण मौत हो गई, जिससे पूरे देश में व्यापक आक्रोश फैल गया।
सीबीआई ने मामले की जांच अपने हाथ में ली और 2,027 पन्नों का प्राथमिक आरोपपत्र और 400 पन्नों का पूरक आरोपपत्र दाखिल किया। पांच साल से अधिक समय तक चले इस मुकदमे के दौरान 100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
भाषा
पारुल नरेश
नरेश