डूसू चुनाव पर सत्य निकेतन हादसा का साया, छात्रों ने उठाई सुरक्षित और किफायती पीजी की मांग

Ads

डूसू चुनाव पर सत्य निकेतन हादसा का साया, छात्रों ने उठाई सुरक्षित और किफायती पीजी की मांग

  •  
  • Publish Date - September 18, 2026 / 06:37 PM IST,
    Updated On - September 18, 2026 / 06:37 PM IST

(तस्वीरों के साथ)

(श्रुति भारद्वाज)

नयी दिल्ली, 18 सितंबर (भाषा) दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र शुक्रवार को जब डूसू चुनाव के लिए मतदान कर रहे थे, तब उनके समक्ष मुख्य मुद्दों में पीजी का अधिक किराया, रहने के लिए किफायती आवास की कमी, बेकार पड़े छात्रावास और आने-जाने का खर्च जैसे मुद्दे शामिल थे। इसके अलावा हाल ही में सत्य निकेतन में ‘पेइंग गेस्ट’ (पीजी) इमारत के गिरने की घटना ने सुरक्षा को लेकर उनकी चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) के चुनाव में डाले गए वोटों की गिनती शनिवार को होगी।

दूसरे राज्यों से दिल्ली आए छात्रों के लिए, ऐसी जगह ढूंढना जो सस्ती और सुरक्षित हो, एक बड़ी चिंता बन गई है। कई छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय के छात्रावास इस बोझ को कम कर सकते हैं, जबकि बेहतर अवसंरचना और यात्रा किराया सस्ता होने से छात्रों को मदद मिलेगी।

मोतीलाल नेहरू कॉलेज में बी.कॉम. प्रथम वर्ष के छात्र हर्ष पांडे ने कहा, ‘‘हम जैसे छात्रों के लिए रहने की जगह सबसे बड़ी चिंता है।’’ पांडे ने अधिक किराया चुकाने में आने वाली मुश्किलों का जिक्र किया और छात्रों के दैनिक खर्च के बोझ को कम करने के लिए मेट्रो किराए में छूट की वकालत की।

पांडे ने बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय के कुछ कॉलेजों में छात्रावास की सुविधा है, लेकिन कुछ ठीक से काम नहीं कर रहे हैं और कुछ बंद पड़े हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर इन छात्रावासों को फिर से खोल दिया जाए और उनकी ठीक से देखभाल की जाए, तो छात्रों के पास पूरी तरह से निजी पीजी पर निर्भर रहने के बजाय रहने का एक सुरक्षित और सस्ता विकल्प होगा।’’

उत्तराखंड निवासी बी.ए. प्रथम वर्ष की छात्रा अदिति के लिए रहने की जगह का मुद्दा सीधे तौर पर सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा, ‘‘दूसरे राज्यों से आने वाले विद्यार्थियों को किफायती आवास की तलाश में अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करना चाहिए।’’

अदिति ने किफायती छात्र आवास की जरूरत को रेखांकित करते हुए कहा, ”जब विद्यार्थी दूसरे राज्य से हों, तो सुरक्षा एक बड़ी चिंता बन जाती है। यदि कॉलेज आने-जाने के दौरान हम सुरक्षित नहीं हैं, तो कम से कम लौटने के लिए हमारे पास ज़्यादा सुरक्षित आवास तो होना ही चाहिए।”

उन्होंने बताया कि रहने की निजी जगह का खर्च भी छात्रों के लिए एक और चिंता की बात है। अदिति ने कहा, ‘‘आरके पुरम के आनंद निकेतन इलाके में रहने वाले छात्र प्रति बेड लगभग 20,000 रुपये का भुगतान कर रहे हैं, और इसमें खाने का खर्च शामिल नहीं है। जो छात्र पहले से ही कॉलेज का खर्च उठा रहे हैं, उनके लिए इतना किराया देना बहुत मुश्किल है।’’

सत्य निकेतन में हाल ही में हुई दुखद घटना के बाद ये चिंताएं और गंभीर हो गई हैं। गत छह सितंबर को दोपहर करीब 1:30 बजे दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिण परिसर के पास छात्रों को पीजी की सुविधा प्रदान करने वाली पांच मंजिला इमारत ढह गई। मलबे से बारह लोगों को बचाया गया, जिनमें से सात की मौत हो गई और पांच घायल हो गए।

कुछ छात्रों के लिए इस घटना ने उन्हें अपने रहने की व्यवस्था पर तुरंत फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया।

वेंकटेश्वर कॉलेज के दूसरे साल के छात्र अनमोल ने इमारत गिरने के बाद सत्य निकेतन से लगभग 500 मीटर दूर स्थित अपने रहने की जगह से दूसरी जगह जाने का फैसला किया, भले ही उसे अब अधिक दूरी की यात्रा करनी पड़ती है।

मोतीलाल नेहरू कॉलेज के चौथे साल के छात्र भूपेश ने बताया कि कुछ छात्र, जिन्होंने पीजी वाली इमारत के गिरने के बाद अपना पीजी छोड़ दिया था, वे तब वापस आ गए जब उनके रहने की जगह को सुरक्षित घोषित कर दिया गया। फिर भी छात्रों के मन में दूरी, किराए और सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।

भूपेश ने कहा, ‘‘कुछ छात्र अपने पीजी को सुरक्षित घोषित किए जाने के बाद वापस आ गए क्योंकि दूर रहने में बहुत अधिक खर्च के साथ असुविधा हो रही थी।’’ उन्होंने यह भी कहा कि डर पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है।

छात्र अब भी ऐसी जगह रहना चाहते हैं जहां सुरक्षा की गारंटी हो और बहुत अधिक किराए का बोझ भी न हो।

आर्यभट्ट कॉलेज में बी.ए. के दूसरे साल के छात्र पवन ने कहा कि छात्रों के पास अक्सर कॉलेज के पास के इलाकों में अधिक किराया देने के अलावा कोई चारा नहीं होता।

पवन ने कहा,‘‘पीजी के किराये को नियंत्रित करने के लिए कोई व्यवस्था होनी चाहिए, क्योंकि मकान मालिक छात्रों से मनमाना किराया वसूल सकते हैं। हम चाहते हैं कि किसी तरह की किराया नीति लागू की जाए।’’

दिल्ली के आर्यभट्ट कॉलेज में बी.ए. में दूसरे वर्ष के छात्र आर्यन ने कहा कि यह मुद्दा केवल आवास तक सीमित नहीं है। उन्होंने छात्रों के लिए मेट्रो किराये में छूट और बेहतर सड़क अवसंरचना की मांग की। उन्होंने कहा कि कैंपस से दूर रहने वाले छात्रों के लिए रोजाना आने-जाने का खर्च काफी अधिक हो सकता है।

अध्यक्ष पद के लिए एबीवीपी के उम्मीदवार यश डबास ने कहा कि अगर वह जीतते हैं तो सबसे पहले सभी कॉलेज परिसर और छात्रावासों का सुरक्षा ऑडिट कराएंगे और ऑडिट संबंधी दस्तावेज को सार्वजनिक किया जाएगा।

भाषा संतोष माधव

माधव