नयी दिल्ली, 22 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद स्थल पर शुक्रवार को बसंत पंचमी के दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक हिंदुओं को पूजा-अर्चना करने, जबकि मुसलमानों को उसी दिन अपराह्न एक बजे से तीन बजे तक नमाज अदा करने की अनुमति दी है।
न्यायालय ने बृहस्पतिवार को यह भी निर्देश दिया कि नमाज के लिए आने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों की सूची जिला प्रशासन को दी जाए।
हिंदू और मुस्लिम समूहों ने 23 जनवरी शुक्रवार को भोजशाला परिसर में धार्मिक रस्मों के लिए अनुमति मांगी थी। इसी दिन बसंत पंचमी के अवसर पर सरस्वती पूजा भी की जाएगी।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने दोनों पक्षों से परस्पर सम्मान और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य और जिला प्रशासन के साथ सहयोग करने की अपील की।
पीठ ने जिला प्रशासन को उस स्थान पर कानून व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश दिया।
न्यायालय ने कहा, ‘‘यह उचित सुझाव दिया जाता है कि दोपहर में, 1 बजे से 3 बजे के बीच नमाज के लिए उसी परिसर के भीतर एक विशेष और अलग क्षेत्र उपलब्ध कराया जाए, जिसमें परिसर के भीतर अलग प्रवेश और निकास द्वार शामिल हों, ताकि नमाज अदा की जा सके।’’
पीठ ने कहा, ‘‘इसी प्रकार, बसंत पंचमी के अवसर पर हिंदू समुदाय के लिए पारंपरिक समारोह आयोजित करने के वास्ते एक अलग स्थान उपलब्ध कराया जाएगा।’’
न्यायालय ने जिला प्रशासन को विवादित स्थल पर कानून व्यवस्था बनाये रखने का निर्देश दिया।
हिंदू समुदाय, भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानते हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है। यह स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित 11वीं शताब्दी का स्मारक है।
एएसआई की ओर से सात अप्रैल 2003 को की गई एक व्यवस्था के तहत, हिंदू समुदाय के सदस्य मंगलवार को भोजशाला परिसर में पूजा-अर्चना करते हैं, जबकि मुसलमान शुक्रवार को परिसर में नमाज अदा करते हैं।
अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के मार्फत दायर याचिका पर मंगलवार को तत्काल सुनवाई का उल्लेख किया गया था।
जैन ने कहा था कि एएसआई के 2003 के आदेश में शुक्रवार के दिन बसंत पंचमी पड़ने से उत्पन्न होने वाली स्थिति का समाधान नहीं किया गया।
आज की सुनवाई के दौरान जैन ने दलील दी कि सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा-अर्चना और हवन होंगे और उन्होंने दिनभर पूजा-अर्चना करने के लिए अनुमति मांगी।
वहीं, मस्जिद समिति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने दलील दी कि शुक्रवार की नमाज दोपहर 1 बजे से 3 बजे के बीच होती है और उसके बाद परिसर खाली किया जा सकता है।
केंद्र सरकार और एएसआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने अदालत को आश्वासन दिया कि जिला प्रशासन कानून व्यवस्था का ध्यान रखेगा।
उच्च न्यायालय ने मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी द्वारा दायर उस अपील का भी निस्तारण कर दिया, जिसमें परिसर के ‘‘वैज्ञानिक सर्वेक्षण’’ संबंधी मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के 11 मार्च 2024 के आदेश को चुनौती दी गई थी।
उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय को निर्देश दिया कि इस मामले की सुनवाई उच्च न्यायालय के वरिष्ठतम न्यायाधीशों में से किसी एक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ द्वारा की जाए।
यह देखते हुए कि एएसआई ने वैज्ञानिक सर्वेक्षण पूरा कर लिया है और अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में उच्च न्यायालय को सौंप दी है, शीर्ष अदालत ने उच्च न्यायालय को निर्देश दिया कि वह रिपोर्ट को सार्वजनिक करे और संबंधित पक्षों को उपलब्ध कराए, जो इस पर आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
पीठ ने कहा कि आपत्तियां दर्ज की जाएं और उसके बाद मामले की अंतिम सुनवाई की जाएगी।
इसने कहा, ‘‘जब तक याचिका पर अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, पक्षकार घटनास्थल पर यथास्थिति बनाए रखेंगे। हालांकि, पक्षकार एएसआई के अप्रैल 2023 के आदेश का पालन करना जारी रखेंगे।’’
भाषा सुभाष नरेश
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