नयी दिल्ली, 27 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को पार्श्वनाथ डेवलपर्स और उसके निदेशकों से कहा कि वे परेशान घर खरीदारों की ओर से उनके खिलाफ दायर मामलों और उन मामलों की मौजूदा स्थिति के बारे में एक रिपोर्ट दाखिल करें।
न्यायालय ने रियल एस्टेट कंपनी को यह भी निर्देश दिया कि वह एक हफ्ते के अंदर उस घर का काम पूरा करे जिसे रीता टिक्कू और लोकेश टिक्कू ने बुक किया था। इन दोनों ने गुरुग्राम के सेक्टर 53 में ‘पार्श्वनाथ एक्जॉटिका’ परियोजना में एक फ्लैट के लिये अपनी जीवन भर की जमा पूंजी लगाई थी।
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ, टिक्कू परिवार की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जो उन्होंने एक रियल एस्टेट कंपनी द्वारा फ्लैट न सौंपे जाने के खिलाफ दायर की थी।
शुरुआत में, पार्श्वनाथ डेवलपर्स के वकील ने पीठ को बताया कि उन्होंने निर्देश के अनुसार उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री में ब्याज सहित रकम जमा कर दी है।
टिक्कू परिवार के वकील ने कहा कि इमारत में लिफ्ट काम नहीं कर रही थीं और साथ ही बिजली की आपूर्ति भी नहीं थी।
पीठ ने कहा, “इसमें कोई शक नहीं। अभी बहुत काम किया जाना बाकी है।”
रियल एस्टेट कंपनी के वकील ने बताया कि लगभग 30 परिवारों को इमारत में स्थानांतरित कर दिया गया है।
न्यायालय ने कहा, “काम को नवीनतम प्रारूप के अनुसार 31 अक्टूबर तक पूरा किया जाए। हम कंपनी और उसके निदेशकों को निर्देश देते हैं कि वे अपने खिलाफ दर्ज मामलों और उन मामलों की मौजूदा स्थिति के बारे में एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करें।”
पीठ ने 20 जुलाई को पार्श्वनाथ डेवलपर्स को गुरुग्राम में घर खरीदारों के पक्ष में दिए गए आदेशों का पालन करने के लिए आखिरी मौका देते हुए एक हफ़्ते का समय दिया था। उन्हें एक हफ़्ते के अंदर पूरी रकम और उस पर 12 प्रतिशत ब्याज रजिस्ट्री में जमा करना था।
इस मामले में अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।
भाषा प्रशांत नरेश
नरेश