न्यायालय ने विशेष अदालत से यूएपीए मामले में एक साल के अंदर सुनवाई पूरी करने को कहा

न्यायालय ने विशेष अदालत से यूएपीए मामले में एक साल के अंदर सुनवाई पूरी करने को कहा

न्यायालय ने विशेष अदालत से यूएपीए मामले में एक साल के अंदर सुनवाई पूरी करने को कहा
Modified Date: August 11, 2026 / 05:01 pm IST
Published Date: August 11, 2026 5:01 pm IST

नयी दिल्ली, 11 अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को दिल्ली की एक विशेष अदालत से कहा कि वह आईएसआईएस जैसे आतंकवादी संगठनों द्वारा साइबर जगत का इस्तेमाल करके युवाओं को कट्टरपंथी बनाने से जुड़े मामले की सुनवाई एक साल के अंदर पूरी करे।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची एवं न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मोहम्मद हिदायतुल्ला की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। हिदायतुल्ला ने दिल्ली उच्च न्यायालय के जनवरी 2025 के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उसे इस मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।

आरोप है कि हिदायतुल्ला, जिसे राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने अक्टूबर 2022 में गिरफ्तार किया था, साइबर जगत के जरिए आईएसआईएस की विचारधारा का प्रसार कर रहा था और जांच के दौरान उससे बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में कई आपत्तिजनक सामग्री मिली थी।

मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान, एनआईए की ओर से पेश हुईं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने शीर्ष अदालत को बताया कि इस मामले में आठ आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किये जा चुके हैं।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने पीठ को बताया कि वह लगभग चार साल से हिरासत में है।

भाटी ने पीठ को बताया कि मामला अब एक विशेष अदालत में है और मामले में 14 गवाह हैं। उन्होंने कहा कि कुल 12 आरोपी हैं, जिनमें से चार फरार हैं और आठ के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया है।

पीठ ने विशेष अदालत को निर्देश दिया कि वह अहम गवाहों से जिरह का काम छह महीने के अंदर पूरा करे।

याचिका का निस्तारण करते हुए, पीठ ने विशेष अदालत से यह भी कहा कि वह सुनिश्चित करे कि मुकदमा एक साल के अंदर संपन्न हो जाए।

पीठ ने कहा कि अगर जरूरत हो, तो विशेष अदालत मामले की सुनवाई प्रतिदिन कर सकती है।

उच्च न्यायालय ने आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया था।

आरोपी ने भारतीय दंड संहिता और गैर कानूनी गतिविधियां निवारण अधिनियम (यूएपीए) की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज मामले में जमानत देने से इनकार करने वाले निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी थी।

भाषा सुभाष दिलीप

दिलीप


लेखक के बारे में