नयी दिल्ली, 16 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष के उन्हें पद से हटाने की मांग वाले प्रस्ताव को स्वीकार करने के फैसले और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रहे संसदीय पैनल की वैधता को चुनौती दी थी।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति एससी शर्मा की पीठ ने वर्मा की याचिका पर आठ जनवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और आज फैसला सुनाया।
इससे पहले आठ जनवरी को उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि यदि उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में राष्ट्रपति के कार्यों का निर्वहन कर सकते हैं, तो राज्यसभा के उपसभापति, सभापति की अनुपस्थिति में उनके कार्यों का निर्वहन क्यों नहीं कर सकते?
ये टिप्पणियां पीठ ने कीं और न्यायमूर्ति वर्मा के इस तर्क से असहमत होने से इनकार कर दिया कि राज्यसभा के उपसभापति के पास किसी प्रस्ताव को अस्वीकार करने का अधिकार नहीं है और न्यायाधीश (जांच) अधिनियम 1968 के तहत, केवल अध्यक्ष और सभापति के पास ही किसी न्यायाधीश के खिलाफ प्रस्ताव को स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार है।
नयी दिल्ली स्थित न्यायमूर्ति वर्मा के आधिकारिक आवास पर 14 मार्च को जले हुए नोटों के बंडल मिलने के बाद उन्हें दिल्ली उच्च न्यायालय से इलाहाबाद उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया था।
भाषा शोभना मनीषा
मनीषा