न्यायालय ने शराब दुकान लाइसेंस घोटाले में टीएएसएमएसी के खिलाफ ईडी जांच पर रोक बढ़ाई

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न्यायालय ने शराब दुकान लाइसेंस घोटाले में टीएएसएमएसी के खिलाफ ईडी जांच पर रोक बढ़ाई

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  • Publish Date - October 14, 2025 / 10:38 PM IST,
    Updated On - October 14, 2025 / 10:38 PM IST

नयी दिल्ली, 14 अक्टूबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (टीएएसएमएसी) के खिलाफ राज्य में कथित शराब खुदरा घोटाले के संबंध में तलाशी, जब्ती या आगे की जांच सहित कोई भी दंडात्मक कार्रवाई करने से रोक के अपने अंतरिम आदेश की अवधि बढ़ा दी।

शीर्ष अदालत ने सवाल किया कि क्या ईडी की कार्रवाई राज्य की जांच शक्तियों का अतिक्रमण है, जबकि ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने आरोप लगाया कि ‘संघवाद के तर्कों के पीछे भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश की जा रही है।’

प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने पूछा, ‘क्या यह राज्य के जांच के अधिकार का अतिक्रमण नहीं होगा? हर मामले में, जब आपको पता चले कि राज्य जांच नहीं कर रहा है, तो क्या आप इसे अपने ऊपर ले लेंगे? धारा 66(2) का क्या होगा?’

राज्य और टीएएसएनएसी के वकील ने भी ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठाया और धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 66(2) का हवाला दिया, जिसके तहत ईडी को किसी अपराध के घटित होने के बारे में जांच के दौरान प्राप्त जानकारी को सक्षम प्राधिकारी के साथ साझा करना आवश्यक है।

प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने 22 मई को कहा था कि केंद्रीय एजेंसी ‘हद’ पार कर रही है और शासन की संघीय अवधारणा का उल्लंघन कर रही है। पीठ ने शराब की दुकानों के लाइसेंस देने में कथित भ्रष्टाचार से संबंधित धन शोधन पहलुओं की अपनी चल रही जांच पर रोक लगा दी थी।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) नीत राज्य सरकार और टीएएसएमएसी ने टीएएसएमएसी के परिसरों पर ईडी द्वारा की गई छापेमारी के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया। याचिका में मद्रास उच्च न्यायालय के 23 अप्रैल के आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें ईडी की कार्रवाई को बरकरार रखा गया था और संवैधानिक अधिकारों और संघीय ढांचे के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगाया गया था।

मंगलवार को पीठ ने टीएएसएमएसी को राहत प्रदान करते हुए कहा कि अब मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा उसके मुख्यालय पर की गई ईडी की तलाशी को रद्द करने से इनकार करने के खिलाफ उसकी याचिका पर सुनवाई तब की जाएगी, जब शीर्ष अदालत धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत बड़े मुद्दों से संबंधित समीक्षा याचिकाओं पर फैसला करेगी।

भाषा आशीष पवनेश

पवनेश