नयी दिल्ली, 21 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र, महाराष्ट्र और हरियाणा सरकार से कॉमेडियन प्रणीत मोरे की उस याचिका पर जवाब मांगा जिसमें गुरुग्राम में एक शो के दौरान कथित तौर पर ‘‘₹370 रुपये की बिरयानी’’ वाली विवादित टिप्पणी के सिलसिले में उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों को एक साथ जोड़ने का अनुरोध किया गया था।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने यह आदेश तब दिया जब मोरे के वकील ने न्यायालय को बताया कि कॉमेडियन ने राष्ट्रीय महिला आयोग समेत सभी मंचों पर माफी मांग ली है।
वकील ने कहा, ‘‘मैंने सभी मंचों पर माफी मांगी है, और मैं सिर्फ शो का प्रस्तोता था। मैं स्थिति की गंभीरता को समझता हूं, लेकिन मैं बस यही चाहता हूं कि गुड़गांव वाली प्राथमिकी को मुंबई वाली प्राथमिकी के साथ जोड़ दिया जाए। मैं मुकदमे का सामना करने के लिए तैयार हूं…।’’
उन्होंने कहा, ‘‘प्राथमिकी दर्ज होने से पहले ही, जैसे ही मुझे स्थिति की गंभीरता का पता चला, मैंने वीडियो डिलीट कर दिया। उस समय मैं यात्रा कर रहा था, और मेरी पीआर टीम ने वीडियो जारी करने से पहले मेरी मंज़ूरी नहीं ली थी।’’
गुरुग्राम की एक कंपनी ने अपने कर्मचारी, वेब डेवलपर हिमांशु जांगड़ा को इसलिए नौकरी से निकाल दिया था क्योंकि उसने मोरे के शो के दौरान ‘‘₹370 रुपये की बिरयानी’’ वाली विवादित टिप्पणी की थी और इसकी सोशल मीडिया पर काफी आलोचना हुई थी।
जांगड़ा को अपनी टिप्पणी के लिए लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उनकी कंपनी, स्टारविक डिजाइन ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया। कंपनी के संस्थापक विवेक विश्वकर्मा ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में उन्हें नौकरी से निकाले जाने की पुष्टि की थी।
विवाद तब शुरू हुआ जब जांगड़ा ने शो के दौरान एक ‘डेट’ का किस्सा सुनाया और बताया कि इसमें उन्होंने चिकन बिरयानी की एक प्लेट पर ₹370 रुपये खर्च किए थे। जांगड़ा ने इसके बाद अपने साथ ‘डेट’ पर गई महिला का जिक्र करते हुए आपत्तिजनक टिप्पणी की और इस पर मोरे को हंसते हुए देखा गया था।
सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना करने के बाद मोरे और जांगड़ा दोनों ने इस घटना के लिए माफी मांगी। जांगड़ा ने अपना इंस्टाग्राम अकाउंट भी निष्क्रिय कर दिया।
टिप्पणी वायरल होने के बाद, सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने इसे महिलाओं के प्रति असंवेदनशील और अपमानजनक बताया। कुछ लोगों ने मोरे की इस बात की आलोचना की कि उन्होंने टिप्पणी पर आपत्ति जताने के बजाय उस पर हंसी-मजाक किया।
भाषा वैभव पवनेश
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