नयी दिल्ली, 19 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने असम में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) कराने का निर्देश निर्वाचन आयोग को देने के अनुरोध वाली जनहित याचिका पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करने से इनकार कर दिया।
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत,न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने निर्वाचन आयोग की इस दलील पर संज्ञान लिया कि असम में अंतिम मतदाता सूची पहले ही तैयार हो चुकी है और याचिका निष्प्रभावी हो गई है।
मृणाल कुमार चौधरी द्वारा दायर जनहित याचिका में निर्वाचन आयोग के उस निर्णय को चुनौती दी गई थी जिसमें अन्य राज्यों में कराए गए अपेक्षाकृत अधिक कठोर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बजाय असम में मानक विशेष पुनरीक्षण कराने का निर्णय लिया गया था।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य को मतदाता सूची की सुचिता को बनाए रखने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण की आवश्यकता है।
हालांकि, निर्वाचन आयोग का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने पीठ को सूचित किया कि असम के लिए अंतिम मतदाता सूची 10 फरवरी को प्रकाशित हो चुकी है।
आयोग द्वारा दी गई जानकारी पर प्रधान न्यायाधीश ने टिप्पणी की,‘‘अब कुछ भी नहीं बचा है।’’
पीठ ने मामले की संवेदनशीलता को रेखांकित करते हुए कहा कि वर्तमान विधायी और न्यायिक ढांचे के तहत, निर्वाचन आयोग को मनमाने ढंग से व्यक्तियों को विदेशी घोषित करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि इस तरह के निर्धारण वैधानिक ‘कट-ऑफ’ तिथियों और विशेष न्यायाधिकरणों द्वारा नियंत्रित होते हैं।
प्रधान न्यायाधीश ने हंसारिया से कहा, ‘‘आपको बहुत संवेदनशील और सावधान रहना होगा।’’
जनहित याचिका में निर्वाचन आयोग के 17 नवंबर, 2025 के परिपत्र को रद्द करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था, जिसमें असम में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बजाय विशेष पुनरीक्षण का आदेश दिया गया था।
याचिकाकर्ता ने अनुरोध किया था कि 2026 में असम चुनाव के लिए एसआईआर के लिए वही निर्देश जारी किए जाएं जो जून 2025 में बिहार में किये गए थे।
याचिका में मतदाता सूची में शामिल करने के लिए आधार कार्ड को एक प्रासंगिक दस्तावेज के रूप में शामिल न करने का भी अनुरोध किया गया था।
विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया की समाप्त होने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक असम में कुल मतदाताओं की संख्या में 2.43 लाख की कमी आई है।
भाषा धीरज प्रशांत
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