न्यायालय ने तमिलनाडु वक्फ बोर्ड को काम करने से रोकने वाले उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाई

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न्यायालय ने तमिलनाडु वक्फ बोर्ड को काम करने से रोकने वाले उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाई

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  • Publish Date - February 19, 2026 / 05:46 PM IST,
    Updated On - February 19, 2026 / 05:46 PM IST

नयी दिल्ली, 19 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें तमिलनाडु वक्फ बोर्ड को किसी भी प्रकार के कार्य करने से प्रतिबंधित किया गया था। उच्च न्यायाय ने अपने आदेश में टिप्पणी करते हुए कहा था कि बोर्ड का गठन प्रथम दृष्टया कानून के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने तमिलनाडु सरकार और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर वक्फ बोर्ड द्वारा उच्च न्यायालय के आठ जनवरी के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब तलब किया।

उच्च न्यायालय ने वक्फ बोर्ड के गठन को चुनौती देने वाली याचिका पर यह आदेश दिया था।

उच्च न्यायालय ने इसलिए वक्फ के कार्य करने पर रोक लगाई थी क्योंकि एकीकृत वक्फ प्रबंधन, अधिकारिता, दक्षता एवं विकास अधिनियम, 1995 की धारा 14 के खंड (डी) में अनिवार्य रूप से नामित दो व्यक्तियों में से एक को मनोनीत नहीं किया गया था।

उच्च न्यायालय के समक्ष दायर याचिका में यह भी दावा किया गया था कि धारा 14 की उपधारा (1) के तहत नियुक्त बोर्ड के कुल सदस्यों में से दो सदस्यों का गैर-मुस्लिम होना अनिवार्य है, इस अनिवार्यता का पालन नहीं किया गया है (पदेन सदस्यों को छोड़कर)।

अधिनियम की धारा 14 बोर्ड की संरचना से संबंधित है।

राज्य सरकार की ओर से पेश हुए वकील ने दलील दी कि बोर्ड का गठन लगभग पूरा हो चुका है क्योंकि अधिकांश सदस्यों को पहले ही मनोनीत या नियुक्त किया जा चुका है और अन्य सदस्यों के संबंध में, इसे पूरा करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

उच्च न्यायालय ने आदेश में यह भी कहा कि दूसरी शर्त का पालन नहीं किया गया, जिसके अनुसार उपधारा (1) के तहत नियुक्त बोर्ड के कुल सदस्यों में से दो सदस्यों का गैर-मुस्लिम होना अनिवार्य है।

उच्च न्यायालय ने कहा था, “वर्तमान में बोर्ड का गठन प्रथम दृष्टया कानून के प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।”

अदालत ने कहा,“उपरोक्त को देखते हुए, बोर्ड को अधिनियम के तहत किसी भी प्रकार की शक्तियां और कार्य करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। बोर्ड को किसी भी प्रकार की शक्तियां और कार्य करने से तत्काल प्रतिबंधित किया जाता है।”

भाषा जितेंद्र प्रशांत

प्रशांत

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