आम्रपाली धनशोधन मामले को गाजियाबांद स्थानांतरित किए जाने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करेगा न्यायालय

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आम्रपाली धनशोधन मामले को गाजियाबांद स्थानांतरित किए जाने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करेगा न्यायालय

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  • Publish Date - July 15, 2026 / 05:46 PM IST,
    Updated On - July 15, 2026 / 05:46 PM IST

नयी दिल्ली, 15 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की उस याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जता दी, जिसमें आम्रपाली समूह की ओर से घर खरीदारों का पैसा हड़पने से जुड़े कथित धनशोधन मामले की कार्यवाही गाजियाबाद की एक अदालत को स्थानांतरित करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने ईडी की ओर से आम्रपाली समूह के पूर्व प्रवर्तक अजय कुमार और दो अन्य के खिलाफ दायर धनशोधन मामले की सुनवाई 11 अगस्त 2025 को लखनऊ की विशेष पीएमएलए अदालत से गाजियाबाद की निर्धारित अदालत में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू की इस दलील पर गौर किया कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने धनशोधन मामला गलत तरीके से स्थानांतरित किया था।

पीठ ने आम्रपाली समूह के पूर्व प्रवर्तकों अनिल कुमार शर्मा, अजय कुमार और शिव प्रिया को नोटिस भी जारी किए।

उच्च न्यायालय ने मामले की सुनवाई गाजियाबाद की अदालत में स्थानांतरित करने का आरोपियों का अनुरोध स्वीकार करते हुए कहा था कि केंद्र सरकार की ओर से सात अक्टूबर 2022 को धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) 2002 के तहत जारी अधिसूचना को देखते हुए यह कदम जरूरी है।

आरोपियों ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि चूंकि कथित अपराध उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले से जुड़ा हुआ है, इसलिए मामले की सुनवाई 2022 की अधिसूचना के अनुसार केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) पश्चिम की गाजियाबाद स्थित भ्रष्टाचार-रोधी विशेष अदालत में की जानी चाहिए।

ईडी ने शीर्ष अदालत के फैसले का हवाला देते हुए इस याचिका का विरोध किया था।

हालांकि, उच्च न्यायालय ने ईडी के विरोध को खारिज करते हुए कहा था कि केंद्रीय जांच एजेंसी की दलीलें पीएमएलए के तहत निर्धारित अदालतों के अधिकार क्षेत्र से जुड़ी कानूनी अधिसूचना के मुताबिक नहीं थीं।

उच्चतम न्यायालय ने 23 जुलाई 2019 के अपने फैसले में घर खरीदारों का भरोसा तोड़ने वाले बिल्डरों को कड़ी फटकार लगाते हुए रियल एस्टेट कानून रेरा के तहत आम्रपाली समूह का पंजीकरण रद्द करने का आदेश दिया था। शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की प्रमुख परियोजनाओं की जमीन का पट्टा रद्द कर समूह को उन संपत्तियों से बेदखल भी कर दिया था।

आम्रपाली समूह के प्रवर्तकों के खिलाफ कई मामले लंबित हैं।

भाषा पारुल मनीषा

मनीषा