नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में सोमवार को नियुक्त की गईं वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकिता सुब्रमणि मोहना, 2018 में न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा के बाद बार से सीधे उच्चतम न्यायालय में नियुक्त होने वाली देश की दूसरी महिला बन गई हैं।
मोहना, न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना के साथ शीर्ष अदालत में दो सेवारत महिला न्यायाधीशों में से एक होंगी। न्यायमूर्ति नागरत्ना 31 अगस्त 2021 से शीर्ष अदालत में न्यायाधीश हैं।
न्यायमूर्ति नागरत्ना 2027 में एक महीने से अधिक समय के लिए प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) भी बनेंगी।
मोहना (59) ने 1988 में कोयंबटूर लॉ कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और तब से वकालत कर रही हैं।
उच्चतम न्यायालय ने 2015 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता नामित किया था।
उन्होंने कई हाई-प्रोफाइल मामलों में पैरवी की है, जिनमें सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों से जुड़ी सेवा शर्तें, वरिष्ठ नागरिकों के संपत्ति अधिकार और कर्नाटक में हिजाब प्रतिबंध से संबंधित मामले शामिल हैं।
मोहना उच्चतम न्यायालय के इतिहास में 12वीं महिला न्यायाधीश होंगी और बार से सीधे नियुक्त होने वाली दूसरी महिला न्यायाधीश हैं। वह जून 2031 में सेवानिवृत्त होंगी।
न्यायमूर्ति एम. फातिमा बीवी 1989 में शीर्ष अदालत में नियुक्त की गई पहली महिला थीं। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में सेवा करने के बाद उन्हें पदोन्नत किया गया था।
न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा के न्यायाधीश रहने के दौरान, एक समय उच्चतम न्यायालय में तीन महिला न्यायाधीश थीं, जिनमें न्यायमूर्ति आर. भानुमति और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी शामिल थीं।
मल्होत्रा ने 27 अप्रैल 2018 को बार से सीधे शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। वह मार्च 2021 में सेवानिवृत्त हुईं।
वर्तमान में शीर्ष अदालत में ऐसे दो अन्य न्यायाधीश हैं, जिन्हें बार से सीधे उच्चतम न्यायालय में नियुक्त किया गया है, जिनमें न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन शामिल हैं।
मोहना के अलावा, मुंबई उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश चन्द्रशेखर, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश शील नागू, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा, तथा जम्मू कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण पल्ली को सोमवार को शीर्ष अदालत के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया।
पिछले महीने, सरकार ने शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या को 34 से बढ़ाकर, प्रधान न्यायाधीश सहित 38 करने के लिए एक कानून में संशोधन करते हुए एक अध्यादेश जारी किया था।
पहले से ही दो रिक्तियां रहने के कारण, स्वीकृत संख्या बढ़ने के बाद, शीर्ष अदालत में कुल छह पद रिक्त हो गए थे।
सोमवार को हुई पांच नियुक्तियों के साथ, उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश का अब एक पद रिक्त रह गया है।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 27 मई को पांच नामों की सिफारिश की थी।
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