टीसीएस के नासिक कार्यालय में यौन उत्पीड़न और ‘पॉश’ अधिनियम के उल्लंघन के गंभीर आरोप : एनसीडब्ल्यू

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टीसीएस के नासिक कार्यालय में यौन उत्पीड़न और ‘पॉश’ अधिनियम के उल्लंघन के गंभीर आरोप : एनसीडब्ल्यू

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  • Publish Date - May 11, 2026 / 08:41 PM IST,
    Updated On - May 11, 2026 / 08:41 PM IST

नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की नासिक इकाई में ‘‘व्यापक यौन उत्पीड़न’’, ‘‘प्रणालीगत डराना-धमकाना’’ और ‘पॉश’ अधिनियम का ‘‘शून्य अनुपालन’’ पाया है। आयोग ने महाराष्ट्र सरकार को सौंपी गई एक तथ्यान्वेषी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।

आयोग ने सोमवार को कहा कि उसने कई महिला कर्मचारियों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया था।

एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष विजया रहाटकर के निर्देश पर गठित तथ्यान्वेषी समिति ने 18 और 19 अप्रैल को नासिक का दौरा किया।

समिति में बंबई उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति साधना जाधव, हरियाणा के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) बी के सिन्हा, उच्चतम न्यायालय की वकील मोनिका अरोड़ा और एनसीडब्ल्यू की वरिष्ठ समन्वयक लीलावती शामिल थीं।

समिति ने पीड़ितों, आंतरिक समिति (आईसी) के सदस्यों, पुलिस अधिकारियों और अन्य गवाहों से बातचीत की और 50 से अधिक पृष्ठों की रिपोर्ट तैयार की, जिसमें 25 से अधिक सिफारिशें शामिल हैं। यह रिपोर्ट आठ मई को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंपी गई।

रिपोर्ट में कहा गया है कि नासिक इकाई में ‘‘गंभीर रूप से परेशान करने वाला और विषाक्त कार्य वातावरण’’ पाया गया, जहां ‘‘व्यापक यौन उत्पीड़न’’ और पद के दुरुपयोग के आरोप सामने आए। समिति के अनुसार, कुछ व्यक्तियों ने टीसीएस नासिक पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर लिया था और वे युवा महिला कर्मचारियों को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से प्रताड़ित करते थे।

रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि महिला कर्मचारियों को धार्मिक अपमान और ‘‘हिंदू विरोधी टिप्पणियों’’ का सामना करना पड़ा, और उन पर धार्मिक मान्यताओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं।

समिति ने इसे ‘‘कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का विशिष्ट मामला’’ बताते हुए कहा कि महिलाओं को धमकी, पीछा करने और अपमानजनक व्यवहार का सामना करना पड़ा।

रिपोर्ट के अनुसार, कई महिला कर्मचारी शिकायत करने से डरती थीं क्योंकि उन्हें नौकरी खोने और पेशेवर परिणाम भुगतने का डर था। समिति ने यह भी आरोप लगाया कि नासिक कार्यालय का नियंत्रण कुछ व्यक्तियों-दानिश, तौसीफ और रजा मेमन—के हाथों में था, जिन्हें अश्विनी चैनानी का संरक्षण प्राप्त था।

रिपोर्ट में कहा गया कि आंतरिक शिकायत समिति (आईसी) ने कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 या ‘पॉश’ अधिनियम के तहत कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की और कार्यस्थल पर जागरूकता कार्यक्रम भी नहीं चलाए गए।

समिति ने इसे ‘‘शून्य अनुपालन’’ बताते हुए कहा कि यह केवल अनुपालन की कमी नहीं, बल्कि ‘‘शासन की विफलता’’ भी है।

रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि ‘पॉश’ अधिनियम के प्रावधानों का सख्ती से पालन किया जाए और शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

रिपोर्ट में सुरक्षा संबंधी खामियों पर भी प्रकाश डाला गया, जिसमें कहा गया कि कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे थे। इसके अलावा कार्यस्थल पर निगरानी और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने की भी सिफारिश की गई है।

एनसीडब्ल्यू ने कहा कि उसने संबंधित प्राधिकरणों और टीसीएस प्रबंधन से उचित कार्रवाई और महिला कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की सिफारिश की है।

भाषा रवि कांत रवि कांत दिलीप

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