अरावली संबंधी समिति की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल : रमेश

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अरावली संबंधी समिति की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल : रमेश

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  • Publish Date - June 30, 2026 / 04:46 PM IST,
    Updated On - June 30, 2026 / 04:46 PM IST

नयी दिल्ली, 30 जून (भाषा) कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने अरावली पर्वतमाला की पुनर्परिभाषा के मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित पांच सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति की संरचना पर मंगलवार को सवाल उठाते हुए कहा कि समिति की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर चिंताएं हैं।

न्यायालय ने बीते तीन जून को यह समिति गठित की थी और इसकी अध्यक्षता ‘इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन’ की महानिदेशक कंचन देवी कर रही हैं। समिति को 31 अगस्त तक एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

पूर्व पर्यावरण मंत्री रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि 29 दिसंबर, 2025 को उच्चतम न्यायालय ने विवेक और साहस का परिचय देते हुए अरावली पहाड़ियों और पर्वत श्रृंखलाओं की पुनर्परिभाषा संबंधी अपने 20 नवंबर, 2025 के पूर्व फैसले को स्वतः वापस ले लिया था, जो पर्यावरण की दृष्टि से विनाशकारी साबित हो सकता था।

उन्होंने कहा कि अब न्यायालय ने इस मुद्दे की नए सिरे से और विस्तार से जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया है, लेकिन समिति में मौजूदा और सेवानिवृत्त अधिकारियों का वर्चस्व है।

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘यह तथ्य कि समिति की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के एक कार्यरत अधिकारी द्वारा की जाएगी और इसके सदस्य सचिव भी उसी मंत्रालय के एक कार्यरत अधिकारी होंगे। यह बेहद निराशाजनक है और इससे समिति की स्वतंत्रता तथा निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं।’’

भाषा हक हक दिलीप

दिलीप