नयी दिल्ली, 26 फरवरी (भाषा) दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) सोसाइटी ने बृहस्पतिवार को दिल्ली उच्च न्यायालय से कहा कि स्कूल-स्तरीय शुल्क विनियमन समिति (एसएलएफआरसी) का गठन एक ‘वृहद कवायद’ है जिसे एक अप्रैल से शुरू होने वाले आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए 10 दिनों के भीतर पूरा नहीं किया जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ दिल्ली सरकार द्वारा एक फरवरी को जारी उस अधिसूचना को चुनौती देने वाली कई स्कूल संघों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। अधिसूचना में विद्यालयों को 10 दिनों के भीतर एसएलएफआरसी गठित करने के लिए कहा गया था।
डीपीएस सोसाइटी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील पुनीत मित्तल ने स्थगन का अनुरोध करते हुए दलील दी कि दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम के अनुसार, एसएलएफआरसी के लिए पांच अभिभावकों का चयन उचित सूचना के बाद स्कूल परिसर में सार्वजनिक लॉटरी के माध्यम से किया जाना है और इसे जल्दबाजी में पूरा नहीं किया जा सकता।
उन्होंने दलील दी, ‘‘दिल्ली में 25,000 छात्र हैं…इसलिए यह एक वृहद कवायद है। यह बटन दबाने जितना आसान नहीं है। इसमें बहुत सारे संसाधनों की आवश्यकता होगी और निश्चित रूप से यह बाद में भी किया जा सकता है।’
मित्तल ने इस बात पर भी जोर दिया कि एसएलएफआरसी में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों से संबंधित कम से कम एक सदस्य को शामिल किया जाना चाहिए, लेकिन स्कूलों के पास ऐसा कोई डेटा नहीं है क्योंकि उन्हें ऐसा रिकॉर्ड रखने का कोई दायित्व नहीं था।
उन्होंने कहा, “स्कूल में, प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च माध्यमिक शिक्षा तक, किसी भी स्तर पर यह सवाल नहीं पूछा जाता कि आप किस धर्म या जाति से हैं। दिल्ली में प्रवेश केवल प्वाइंट-आधारित प्रणाली पर होता है।”
वकील ने कहा कि स्कूलों में अन्य राष्ट्रीयता वाले बच्चे भी हैं और छात्रों की जाति से संबंधित आंकड़े कम समय में एकत्र करना संभव नहीं है।
उन्होंने सवाल किया, “यह सब एक फरवरी की अधिसूचना के अनुसार 10 दिनों के भीतर किया जाना है। क्या यह संभव है? क्या यह एक वृहद कवायद नहीं है? इतनी जल्दी क्या है?”
अदालत इस मामले की अगली सुनवाई 27 फरवरी को करेगी।
दिल्ली सरकार ने पहले अदालत को बताया था कि निजी स्कूल नए शैक्षणिक सत्र के लिए एक अप्रैल से शुल्क तब तक नहीं वसूल सकते जब तक कि नये शुल्क विनियमन कानून के अनुसार इसे निर्धारित और अनुमोदित नहीं कर दिया जाए।
एक फरवरी को, दिल्ली सरकार ने दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम के क्रियान्वयन को ‘सुचारू’ बनाने के लिए राजपत्र अधिसूचना जारी की थी। दिल्ली सरकार ने यह अधिसूचना उच्चतम न्यायालय द्वारा उसके नये शुल्क निर्धारण कानून को लेकर सवाल उठाने के बाद जारी की थी।
भाषा अमित अविनाश
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