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नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) राज्यसभा में मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में छिड़े वर्तमान संघर्ष के कारण उत्पन्न स्थिति से निबटने के लिए सात नये समूहों का गठन किया गया है जो एलपीजी, आवश्यक सेवाओं एवं वस्तुओं की आपूर्ति एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अन्य विषयों का नियमित आकलन कर सुझाव देंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और इसके कारण भारत के सामने आई चुनौतियों पर राज्यसभा में अपनी ओर से वक्तव्य देते हुए कहा कि तीन सप्ताह से अधिक समय हो चुका है तथा इस युद्ध ने विश्व में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है।
उन्होंने कहा कि भारत के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है। ‘‘इस युद्ध से हमारे व्यापार के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं। इससे पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरक जैसे जरूरी सामान की नियमित आपूर्ति प्रभावित हो रही है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी अर्थव्यवस्था के आधारभूत स्तंभ मजबूत हैं तथा सरकार पल पल बदलते हालात पर नजर रखे हुए है। सरकार इसके अल्पकालिक, मध्य कालिक एवं दीर्घकालिक प्रभावों पर नजर रखने के लिए एक रणनीति के तहत काम कर रही है।’’
मोदी ने कहा कि सरकार ने एक अंतर मंत्रालयी समूह बनाया है जो नियमित बैठक कर आयात-निर्यात में आने वाली बाधाओं का आकलन करता है। उन्होंने कहा कि जैसे कोरोना महामारी के दौरान अलग अलग क्षेत्रों की चुनौतियों का सामना करने के लिए विशेषज्ञों एवं अधिकारियों के विभिन्न समूह बने थे, वैसे ही कल सात नये समूहों का गठन किया गया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ये समूह गैस, महंगाई आदि विषयों पर विचार कर समाधान के लिए काम करेंगे।
मोदी ने कहा कि उन्होंने युद्ध की शुरुआत के बाद से पश्चिम एशिया के ज्यादातर देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो दौर में फोन पर बात की है। ‘‘हम खाड़ी के सभी देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं। हम ईरान, इजराइल और अमेरिका के साथ भी संपर्क में हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारा लक्ष्य संवाद और कूटनीति के माध्यम से क्षेत्र में शांति की बहाली का है। हमने संघर्ष को कम करने और होर्मुज मार्ग को खोलने के बारे में भी बातचीत की है।’’
मोदी ने कहा कि खाड़ी के देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं, वहां काम करते हैं। उन्होंने कहा कि उनका जीवन एवं आजीविका भारत के लिए बहुत बड़ी चिंता का कारण है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में दुनिया के कई जहाज फंसे हुए हैं। उनमें भारतीय चालक दल की संख्या भी बहुत अधिक है तथा यह भी भारत की एक बड़ी चिंता का विषय है।
पश्चिम एशिया संकट पर भारत की स्थिति स्पष्ट करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वाणिज्यिक जहाजों पर हमला और तथा होर्मुज व्यापार जैसे अंतरराष्ट्रीय मार्ग में रुकावट अस्वीकार्य है।
उन्होंने कहा, ‘‘भारत ने नागरिकों, असैन्य ढांचों, ऊर्जा एवं परिवहन से जुड़ी अवसरंचना पर हमलों का विरोध किया है।’’ उन्होंने कहा कि युद्ध के इस माहौल में भारत कूटनीति के जरिये भारतीय जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए सतत प्रयास कर रहा हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट की इस घड़ी में देश-विदेश में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
मोदी ने कहा, ‘‘युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक लगभग 3 लाख 75 हजार भारतीय सुरक्षित देश लौट चुके हैं। ईरान से ही अभी तक लगभग एक हजार भारतीय सुरक्षित वापस आए हैं। इनमें मेडिकल की पढ़ाई करने वाले 700 से अधिक युवा हैं।’’
उन्होंने कहा कि इन हमलों में कुछ भारतीयों की जान गयी है और कुछ घायल हुए हैं तथा उनके परिवार की सहायता के लिए हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं।
मोदी ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में दुनिया के विभिन्न देशों से तेल एवं एलपीजी गैस से भरे जहाज भारत पहुंचे हैं। मोदी ने कहा कि तेल, गैस और उर्वरक लाने वाले जहाज भारत तक सुरक्षित पहुंचें, सरकार इसके लिए हर तरह से प्रयास कर रही है।
उन्होंने आगाह किया कि यदि इस युद्ध से बनी वैश्विक परिस्थितियां लंबे समय तक बनी रहती हैं तो गंभीर दुष्परिणाम तय हैं। ‘‘इसलिए भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपना जुझारूपन बनाने के लिए जो प्रयास किए हैं, वह उन्हें और गति दे रहा है।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि ’’कोई भी संकट हमारे हौसले और धैर्य की परीक्षा लेता है।’’ उन्होंने कहा कि देश ऐसे संकटों का सामना कर सके, इसके लिए पिछले 11 वर्ष में निरंतर निर्णय किए गए हैं तथा ऊर्जा आयात का विविधिकरण ऐसे ही प्रयासों का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि देश की कच्चे तेल एवं गैस की मांग को 27 देशों से आयात करके पूरा किया जाता था, वहीं आज भारत 41 देशों से ऊर्जा आयात करता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते दशक में भारत ने संकट के ऐसे ही समय के लिए कच्चे तेल के भंडारण को भी प्राथमिकता दी है। उन्होंने आज भारत के पास 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व है और 65 लाख मीट्रिक टन से अधिक के रिजर्व की व्यवस्था पर देश काम कर रहा है।
प्रधानमंत्री ने उच्च सदन के माध्यम से देश को आश्वासन दिया कि भारत के पास कच्चे तेल के भंडारण एवं आपूर्ति की व्यवस्थाएं हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले कई वर्षों से पीएनजी को बढ़ावा देने तथा रसोई गैस के उत्पादन को बढ़ाने के लिए काफी काम किया है। उन्होंने कहा कि सरकार का यह प्रयास रहा है कि हर क्षेत्र में दूसरों पर निर्भरता को कम से कम किया जाए।
उन्होंने कहा कि सरकार ने विदेशी जहाजों पर व्यापार से बचने के लिए देश में 70 हजार करोड़ रूपये से भारत में निर्मित जहाज बनाने का कार्यक्रम शुरू किया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान संकट ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला दिया तथा सरकार इस बात को ध्यान में रख कर काम कर रही है कि इसका भारत पर कम से कम प्रभाव हो।
उन्होंने देश में उर्वरक की कमी नहीं होने देने के लिए किये जा रहे प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘मैं देश के किसानों को विश्वास दिलाता हूं कि सरकार उनकी हरसंभव मदद करती रहेगी।’’
प्रधानमंत्री ने वर्तमान संकट और प्रवासी लोगों और उनके परिवारों की मदद के लिए राज्य सरकारों से सक्रियता से काम करने और त्वरित कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने राज्य सरकारों से कहा कि वह देश की विकास गति को बरकरार रखने के लिए सुधारों की प्रक्रिया जारी रखें।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कोरोना काल में केंद्र एवं राज्य की सरकारों ने मिलकर ‘टीम इंडिया’ की तरह काम किया था, वैसे ही आगे भी काम करते रहना पड़ेगा।
भाषा
माधव मनीषा
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