शाह ने मादक पदार्थ नेटवर्क के खिलाफ तीन साल का निर्णायक ‘रोडमैप’ पेश किया

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शाह ने मादक पदार्थ नेटवर्क के खिलाफ तीन साल का निर्णायक ‘रोडमैप’ पेश किया

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  • Publish Date - June 26, 2026 / 09:33 PM IST,
    Updated On - June 26, 2026 / 09:33 PM IST

नयी दिल्ली, 26 जून (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को तीन साल का एक नया ‘रोडमैप’ घोषित किया, जिसका उद्देश्य ‘‘कठोर कार्रवाई’’, कानून लागू करने और वित्तीय जांच के माध्यम मादक पदार्थ तस्करी के नेटवर्क को खत्म करना है।

राष्ट्रीय नार्को-समन्वय केंद्र (एनसीओआरडी) की 10वीं शीर्ष स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए, गृह मंत्री ने मादक पदार्थ नियंत्रण (2026-2029) पर दृष्टिकोण पत्र और स्वापक नियंत्रण ब्यूरो की वार्षिक रिपोर्ट-2025 जारी की, साथ ही वीडियो कॉन्फ्रेंस के ज़रिए जम्मू और गुवाहाटी में एजेंसी के क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन किया।

उन्होंने कहा कि दृष्टिकोण पत्र में एक ऐसी रणनीति की रूपरेखा दी गई है जो सिंथेटिक मादक पदार्थ, डार्कनेट-आधारित तस्करी, सीमा-पार तस्करी और अन्य उभरते खतरों के खिलाफ संस्थागत क्षमता को मजबूत करने पर केंद्रित है।

शाह ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, हम अगले तीन साल में मादक पदार्थ के पूरे कारोबार तंत्र पर इतनी ज़बरदस्त चोट करेंगे कि वह दशकों तक नहीं उबर नहीं पाएगा।’’

कार्यक्रम के दौरान शाह ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ तीन सूत्री रणनीति पेश की – पता लगाओ (डिटेक्ट), बाधित करो (डिसरप्ट) और नष्ट करो (डिस्ट्रॉय)।

शाह ने कहा कि केंद्र सरकार स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस) में संशोधन पर विचार कर रही है, ताकि उन खामियों को दूर किया जा सके जिनका फायदा मादक पदार्थ तस्करी गिरोह उठा रहे हैं।

उन्होंने मादक पदार्थ के तस्करों और आपूर्तिकर्ताओं के प्रति सख्त एवं निर्मम रुख अपनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

गृह मंत्री ने देश में मादक पदार्थ की समस्या से निपटने में एजेंसियों द्वारा हासिल की गई सफलताओं का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा, “वर्ष 2004 से 2014 के बीच 26 लाख किलोग्राम सिंथेटिक मादक पदार्थ जब्त किए गए थे। इसके विपरीत, वर्ष 2014 से 2026 के बीच हमने 1.18 करोड़ किलोग्राम सिंथेटिक मादक पदार्थ जब्त किए हैं। इससे स्पष्ट है कि हमारा अभियान लगातार सफलता की ओर बढ़ रहा है।”

शाह ने कहा कि वर्ष 2004 से 2014 के बीच जब्त किए गए मादक पदार्थों का मूल्य लगभग 40,000 करोड़ रुपये था, जबकि वर्ष 2014 से 2026 के बीच जब्त किए गए मादक पदार्थों का मूल्य लगभग 1.84 लाख करोड़ रुपये है।

उन्होंने कहा कि यह सरकार की कार्रवाई की प्रभावशीलता और दायरे में उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है।

शाह ने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्रालय एनडीपीएस अधिनियम को और सशक्त बनाने के लिए उस पर पुनर्विचार कर रहा है तथा राज्यों से इस संबंध में अपने सुझाव साझा करने को कहा है।

उन्होंने कहा कि पुलिस महानिदेशक अपने सुझाव गृह मंत्रालय को भेज सकते हैं, जबकि मुख्य सचिव अपने सुझाव वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग को भेज सकते हैं।

शाह ने कहा कि तस्करों और उनके नेटवर्क से जुड़े लोगों के प्रति कठोर एवं निर्मम रुख अपनाया जाना चाहिए, जबकि मादक पदार्थ के पीड़ितों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण रखा जाना चाहिए।

गृह मंत्री ने कहा कि मादक पदार्थ के खिलाफ अभियान को चार स्तंभों पर आधारित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इनमें कानून लागू करना, खुफिया जानकारी का संग्रहण, साझा करना और अभियान चलाना; अग्रद्रव्यों (प्रीकर्सर) तथा सिंथेटिक मादक पदार्थ पर नियंत्रण; मांग में कमी लाना और लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना; तथा मादक पदार्थ रोधी एजेंसियों की क्षमता निर्माण, समन्वय और निगरानी शामिल हैं।

शाह ने राज्य सरकारों से हर परिस्थिति में वास्तविक समय में सूचना साझाकरण सुनिश्चित करने को भी कहा।

उन्होंने कहा, “इसके लिए स्वापक नियंत्रण ब्यूरो ने कई पोर्टल विकसित किए हैं। मैं सभी मुख्य सचिवों और पुलिस प्रमुखों से आग्रह करता हूं कि वे अपने-अपने राज्यों से संबंधित अपराधों का विवरण निर्धारित समयसीमा के भीतर इन पोर्टल पर अपलोड करें। इससे भारत सरकार को इन मामलों की समीक्षा करने और आवश्यक सुझाव तथा प्रतिक्रिया देने में सहायता मिलेगी।”

शाह ने सभी मुख्य सचिवों और पुलिस प्रमुखों से एनसीओआरडी बैठकों को परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “बैठकों की संख्या निश्चित रूप से बढ़ रही है, लेकिन यह भी आवश्यक है कि वे परिणामोन्मुख हों।”

गृह मंत्री ने कहा कि मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई में देश एक ऐसे नाजुक मोड़ पर खड़ा है, जहां अगले तीन वर्ष यह तय करेंगे कि ‘‘नशे की लत हम पर विजय प्राप्त करती है या हम नशे की लत पर विजय प्राप्त करते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अगले 100 वर्षों में राष्ट्र के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए हमें पूरे संकल्प के साथ सामूहिक रूप से इस चुनौती का मुकाबला करना होगा। इसके लिए सभी सरकारों को एक मंच पर आना होगा। हमें इस प्रयास में जनता का मार्गदर्शन करने वाले संत-महात्माओं, भविष्य गढ़ने वाले युवाओं और मातृशक्ति को भी शामिल करना होगा।’’

एनसीओआरडी की इस बैठक में 44 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के प्रमुख हितधारकों के साथ-साथ राज्य सरकारों और मादक पदार्थों से संबंधित कानून लागू करने वाली एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने प्रत्यक्ष एवं ऑनलाइन माध्यम से भाग लिया।

बैठक में नशामुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार के प्रयासों को और मजबूत बनाने पर चर्चा की गई।

सिंथेटिक मादक पदार्थ से उत्पन्न चुनौतियों, डार्कनेट के माध्यम से होने वाली तस्करी तथा अगले तीन वर्षों में नशा मुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों की पहुंच बढ़ाने जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ।

शाह ने केंद्रीय सरकारी विभागों, मादक पदार्थ कानून प्रवर्तन एजेंसियों और अन्य हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद तीन वर्ष 2026-2029 के लिए तैयार मादक पदार्थ नियंत्रण संबंधी दृष्टिकोण पत्र भी जारी किया।

यह दस्तावेज मादक पदार्थ की समस्या संबंधी पहलुओं- ‘‘मांग में कमी, आपूर्ति में कमी और उससे होने वाली हानि को कम करने’’ से निपटने के लिए एक साझा कार्ययोजना उपलब्ध कराएगा।

इस कार्ययोजना में नेटवर्क-केंद्रित प्रवर्तन प्रणाली की परिकल्पना की गई है। इसमें सभी हितधारकों की जिम्मेदारियां, समयसीमा और मापनीय लक्ष्य स्पष्ट रूप से निर्धारित किए गए हैं तथा प्रवर्तन, मांग में कमी, पुनर्वास, जन-जागरूकता, क्षमता निर्माण और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को एकीकृत किया गया है।

इससे पहले, सरकार की ओर से जारी एक बयान में कहा गया था, ‘‘यह दृष्टिकोण पत्र देशभर में मादक पदार्थों की समस्या पर अंकुश लगाने के लिए नीति-निर्माण, उसके क्रियान्वयन और संस्थागत सुदृढ़ीकरण के वास्ते मार्गदर्शक ढांचे के रूप में कार्य करेगा।’’

उन्होंने ‘ड्रग डिस्पोजल फोर्टनाइट अभियान’ का ई-उद्घाटन भी किया, जिसके तहत देशभर में विभिन्न केंद्रीय और राज्यों की कानून लागू करने वाली एजेंसियों द्वारा लगभग 2,09,500 किलोग्राम मादक पदार्थ नष्ट किए जाएंगे, जिनकी अनुमानित कीमत 6,000 करोड़ रुपये है।

भाषा नेत्रपाल दिलीप

दिलीप