बच्चों का भविष्य संवारना सरकार, अभिभावकों और शिक्षकों की साझा जिम्मेदारी: उमर अब्दुल्ला
बच्चों का भविष्य संवारना सरकार, अभिभावकों और शिक्षकों की साझा जिम्मेदारी: उमर अब्दुल्ला
श्रीनगर, 25 अगस्त (भाषा) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को कहा कि बच्चों का भविष्य संवारने की पूरी जिम्मेदारी केवल शिक्षकों पर नहीं डाली जा सकती और तेजी से बदलती दुनिया के लिए अगली पीढ़ी को तैयार करने के वास्ते सरकार, अभिभावकों और शिक्षकों को मिलकर काम करना होगा।
अब्दुल्ला ने यहां जम्मू-कश्मीर शिक्षक मंच द्वारा आयोजित एक दिवसीय शिक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘बच्चों का भविष्य तय करने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है लेकिन पूरी जिम्मेदारी उन पर डालना अनुचित होगा और इससे पहले से ही चुनौतीपूर्ण इस पेशे पर अनावश्यक दबाव बढ़ेगा।’’
‘बच्चा हमारी प्राथमिकता’ विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं और शिक्षकों ने शिक्षा क्षेत्र के प्रमुख मुद्दों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के सामने मौजूद चुनौतियों और भविष्य के मार्ग पर चर्चा की।
अब्दुल्ला ने शिक्षण पेशे में आए बदलावों का जिक्र करते हुए कहा कि आज शिक्षकों के सामने जो चुनौतियां हैं, वे 10 या 20 साल पहले की चुनौतियों से बहुत अलग हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘एक समय था जब हम शिक्षकों की शिकायत करने के बारे में सोच भी नहीं सकते थे। मुझे याद नहीं कि केजी (किंडरगार्टन) से लेकर 12वीं कक्षा तक मैंने कभी किसी शिक्षक की शिकायत अपने माता-पिता से की हो।’’
उन्होंने कहा कि आज बच्चे बिल्कुल अलग माहौल में बड़े हो रहे हैं।
अब्दुल्ला ने कहा कि बच्चों को सवाल पूछने के लिए निश्चित रूप से प्रोत्साहित किया जाना चाहिए लेकिन उन्हें जवाब सुनना और उन पर विचार करना भी सीखना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति ए. पी. जे. अब्दुल कलाम भी बच्चों का भविष्य संवारने और बेहतर समाज के निर्माण में माता-पिता एवं शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते थे।
अब्दुल्ला ने कहा कि आज शिक्षकों को बच्चों का ध्यान अपनी ओर बनाए रखने के लिए स्मार्टफोन, सोशल मीडिया, कई टेलीविजन चैनलों और अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से भी मुकाबला करना पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सरकार अक्सर शिक्षकों को कक्षा में पढ़ाने के अलावा कई अन्य गतिविधियों की जिम्मेदारी देकर उनका काम बढ़ा देती है।
अब्दुल्ला ने शिक्षक समुदाय को आश्वासन दिया कि सरकार तबादलों, पदोन्नति, रिक्त पदों और अन्य मुद्दों सहित सेवा एवं पेशे से जुड़ी उनकी वास्तविक समस्याओं का समाधान करेगी।
अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘दूरदराज के गांवों के विद्यालयों में शिक्षा देना आसान नहीं है। वहां काम करना कठिन है।’’
उन्होंने ऐसे क्षेत्रों में सेवाएं देने वाले शिक्षकों पर अधिक ध्यान दिए जाने की जरूरत पर जोर दिया।
अब्दुल्ला ने शिक्षकों की तैनाती में असमानता की ओर भी ध्यान दिलाते हुए कहा कि शहरों के कुछ विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या कम और शिक्षक अधिक हैं, जबकि दूरदराज के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बुनियादी ढांचे की कमियां दूर करना और रिक्त पद भरना सरकार की जिम्मेदारी है, शिक्षकों की नहीं।
उन्होंने कहा, ‘‘बुनियादी ढांचे में कमियां हैं। हम स्मार्ट कक्षाओं की बात करते हैं लेकिन हम उन्हें कहां तक पहुंचा पाए हैं? कुछ जगहों पर हम अब भी उचित बुनियादी ढांचा उपलब्ध नहीं करा पाए हैं और स्कूल किराये के भवनों तथा असुरक्षित इमारतों में संचालित किए जा रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि सरकार विद्यालयों के बुनियादी ढांचे में धीरे-धीरे सुधार कर रही है और इन कमियों को दूर करने की जिम्मेदारी प्रशासन की है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर ने 1947 से अब तक काफी प्रगति की है, लेकिन दुनिया में बदलाव की रफ्तार तेज हो रही है और शिक्षा व्यवस्था को बच्चों को बिल्कुल अलग भविष्य के लिए तैयार करना होगा।
अब्दुल्ला ने कहा कि इस कार्य में शिक्षक तभी सफल होंगे जब सरकार उन्हें काम करने के लिए उचित माहौल उपलब्ध कराने में सफल होगी।
भाषा सिम्मी माधव
माधव

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