shashi tharoor/ image source: ibc24 file image
Shashi Tharoor on Demographic Issue: नई दिल्ली: कांग्रेस के भीतर इन दिनों कई मुद्दों पर अलग-अलग सुर सुनाई दे रहे हैं। एक तरफ जहां पार्टी नेता राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन के कई चेहरे केंद्र सरकार पर लगातार हमलावर हैं, वहीं कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केंद्र सरकार के एक अहम फैसले का खुलकर समर्थन कर सबको चौंका दिया है। थरूर ने देश में हो रहे ‘अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय बदलाव’ की जांच के लिए बनाई गई हाई प्रोफाइल समिति का स्वागत करते हुए कहा कि यह मुद्दा बेहद गंभीर है और देश को यह समझने की जरूरत है कि आखिर किन बदलावों से गुजरना पड़ रहा है। उनके इस बयान को राजनीतिक गलियारों में कांग्रेस की आधिकारिक लाइन से अलग रुख के तौर पर देखा जा रहा है।
एक न्यूज चैनल से बातचीत में थरूर ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा गठित समिति का उद्देश्य महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश के कई हिस्सों में जनसंख्या संरचना को लेकर चिंताएं लगातार सामने आ रही हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे मामले में पारदर्शिता बेहद जरूरी होगी। थरूर ने साफ तौर पर चेतावनी दी कि यदि समिति के आंकड़े अधूरे या पक्षपातपूर्ण हुए, तो उनका राजनीतिक दुरुपयोग भी हो सकता है और इससे विवाद खड़ा होने की आशंका बढ़ जाएगी। उन्होंने कहा कि किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले तथ्यों और वास्तविक आंकड़ों को सामने लाना सबसे जरूरी है। खास बात यह रही कि कांग्रेस पार्टी की ओर से अब तक इस समिति पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन थरूर का बयान राजनीतिक बहस को और तेज कर गया है।
दरअसल, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में देश में हो रहे ‘अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय परिवर्तन’ की जांच के लिए एक विशेष समिति गठित करने का ऐलान किया था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए शाह ने कहा था कि घुसपैठ और अन्य कारणों से होने वाले जनसंख्या परिवर्तन देश के वर्तमान और भविष्य के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 को इस दिशा में समिति गठित करने की घोषणा की थी और अब सरकार ने औपचारिक रूप से इस समिति का गठन कर दिया है। सरकार के मुताबिक समिति सीमावर्ती इलाकों सहित उन क्षेत्रों का अध्ययन करेगी जहां जनसंख्या संतुलन में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर करेंगे। समिति में पूर्व आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, पूर्व आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव, अर्थशास्त्री शामिका रवि और जनगणना आयुक्त को भी शामिल किया गया है। भाजपा लंबे समय से खासकर पूर्वोत्तर राज्यों में जनसंख्या बदलाव और कथित घुसपैठ का मुद्दा उठाती रही है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा कई बार दावा कर चुके हैं कि बांग्लादेश से होने वाली घुसपैठ के कारण असम की जनसांख्यिकी तेजी से बदल रही है। भाजपा का कहना है कि यह केवल असम तक सीमित नहीं बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। ऐसे में थरूर का सरकार के कदम के समर्थन में सामने आना राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।