एसआईआर ने पश्चिम बंगाल में स्थानीय स्तर पर सत्ता विरोधी लहर को खत्म कर दिया : सागरिका घोष

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एसआईआर ने पश्चिम बंगाल में स्थानीय स्तर पर सत्ता विरोधी लहर को खत्म कर दिया : सागरिका घोष

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  • Publish Date - March 22, 2026 / 10:39 AM IST,
    Updated On - March 22, 2026 / 10:39 AM IST

(सौगत मुखोपाध्याय)

कोलकाता, 22 मार्च (भाषा) तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य सागरिका घोष ने कहा कि पश्चिम बंगाल में स्थानीय स्तर पर जो सत्ता-विरोधी लहर थी, वह एसआईआर प्रक्रिया के प्रभाव से काफी हद तक दब गयी है, जिससे आगामी विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस की स्थिति स्पष्ट रूप से भाजपा से बेहतर है।

पत्रकार से नेता बनी घोष को चुनाव के लिए तृणमूल कांग्रेस का स्टार प्रचारक बनाया गया है। उन्होंने कहा कि नेता के रूप में ममता बनर्जी के खिलाफ उनके समर्थकों में कोई असंतोष नहीं है। उन्होंने कहा कि असंतोष कुछ स्थानीय नेताओं के खिलाफ हो सकता है, जिन्हें इस बार टिकट नहीं दिया गया।

बनर्जी ने 17 मार्च को जारी 291 उम्मीदवारों की सूची में 74 मौजूदा विधायकों के टिकट काट दिए हैं जो सत्ता विरोधी लहर को खत्म करने के लिए पार्टी की एक सोची-समझी रणनीति का संकेत है।

घोष ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘भाजपा का एजेंडा एसआईआर प्रक्रिया का इस्तेमाल कर ममता बनर्जी को हराने और किसी भी तरह पश्चिम बंगाल पर कब्जा करने का था, क्योंकि वह पिछले 15 वर्षों से लगातार भाजपा को हराती रही हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन यह कदम उल्टा पड़ गया और तृणमूल को फायदा मिला। अगर कहीं स्थानीय स्तर पर सत्ता-विरोधी लहर थी भी, तो वह एसआईआर के कारण पूरी तरह दब गई। यह भाजपा की बड़ी गलती थी। वे जितने नाम हटाना चाहें, हटा लें, हम फिर भी जीतेंगे।’’

तृणमूल सांसद ने कहा कि ‘‘जल्दबाजी में लागू’’ विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया ने राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ माहौल बना दिया है। एसआईआर में आम लोगों के साथ ही नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन, पूर्व मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती, मंत्री शशि पांजा और क्रिकेटर ऋचा घोष जैसे लोगों की नागरिकता पर भी सवाल खड़े किए।

उन्होंने कहा, ‘‘वे घुसपैठिए कहां हैं, जिनकी बात भाजपा बार-बार करती थी?’’

घोष ने कहा कि तृणमूल प्रमुख के जमीनी जुड़ाव और उनके शासन रिकॉर्ड पर लोगों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलेगा, जिसे मीडिया में पर्याप्त महत्व नहीं मिला।

उन्होंने कहा, ‘‘वह 24 घंटे जनता से जुड़ी रहने वाली नेता हैं। तीन कार्यकाल के बाद स्थानीय स्तर पर कुछ सत्ता विरोधी लहर होना स्वाभाविक है, लेकिन मुख्यमंत्री के रूप में उनके खिलाफ ऐसा कोई भाव नहीं है। राज्य में वह ही अंतिम सहारा हैं। लोग जानते हैं कि मुश्किल में वे उनके पास जा सकते हैं।’’

घोष ने बनर्जी को ‘‘दक्षिण एशिया में अद्वितीय राजनीतिक व्यक्तित्व’’ बताते हुए कहा कि उन्होंने बिना किसी राजनीतिक विरासत या मार्गदर्शक के पुरुष प्रधान राजनीति में एक मजबूत पार्टी खड़ी की है।

घोष कहा, ‘‘उन्होंने (बनर्जी ने) तृणमूल में महिला नेताओं को जितना स्थान दिया है, उतना किसी अन्य पार्टी ने नहीं दिया। हम महिला-प्रथम पार्टी हैं और महिलाओं के खिलाफ अपराध बर्दाश्त नहीं करेंगे।’’

चुनाव में चुनौतियों पर घोष ने कहा कि झूठे प्रचार, अफवाहों और दुष्प्रचार से निपटना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती है।

भाषा गोला खारी

खारी