नयी दिल्ली, छह जनवरी (भाषा) निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि उसके पास मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) करने की शक्ति और क्षमता है। उसने कहा कि इसके अलावा यह सुनिश्चित करना उसका संवैधानिक कर्तव्य है कि किसी भी विदेशी को मतदाता के रूप में पंजीकृत न किया जाए।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष निर्वाचन आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने ये दलीलें पेश कीं।
पीठ ने निर्वाचन आयोग के बिहार सहित कई राज्यों में एसआईआर करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई फिर से शुरू की, जिनमें चुनाव निकाय की शक्तियों के दायरे, नागरिकता और मतदान के अधिकार पर महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न उठाए गए हैं।
द्विवेदी ने रेखांकित किया कि राज्य के तीनों अंगों में सभी प्रमुख संवैधानिक पदाधिकारी भारतीय नागरिक होने चाहिए। उन्होंने उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित संविधान के अनुच्छेद 124(3) जैसे प्रावधानों का हवाला दिया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसे शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारियों की नियुक्ति के लिए प्रमुख शर्तों में से एक यह है कि व्यक्ति का भारतीय नागरिक होना आवश्यक है।
द्विवेदी ने कहा, ‘‘सभी महत्वपूर्ण नियुक्तियां… कोई भी नियुक्ति तब तक नहीं की जा सकती जब तक कि व्यक्ति नागरिक न हो, इसलिए हमारा संविधान मुख्य रूप से नागरिक-केंद्रित है।’’
इस चिंता को दूर करते हुए कि एसआईआर राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के समान एक समानांतर नागरिकता-निर्धारण कवायद हो सकता है, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मतदाता सूची और एनआरसी मौलिक रूप से अलग-अलग उद्देश्यों की पूर्ति करते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘एनआरसी में सभी व्यक्तियों को शामिल किया गया है, जबकि मतदाता सूची में केवल 18 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को ही शामिल किया गया है।’’
द्विवेदी ने यह भी कहा कि अनुच्छेद 326 के तहत केवल नागरिक ही मतदान कर सकते हैं और नागरिकता किसी सक्षम प्राधिकार के माध्यम से ही प्राप्त की जानी चाहिए।
यह उल्लेख करते हुए कि निर्वाचन आयोग राजनीतिक निर्णय नहीं ले रहा है, बल्कि अपने संवैधानिक दायित्व का निर्वहन कर रहा है, उन्होंने कहा कि चाहे मतदाता सूची में दस या हजारों विदेशी नागरिक हों, उन्हें बाहर करना ही होगा।
द्विवेदी बृहस्पतिवार (8 जनवरी) को अपनी दलीलें फिर से शुरू करेंगे।
भाषा नेत्रपाल वैभव
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