सिस्टर अभया मामलाः कैथोलिक पादरी और नन को आजीवन कारावास की सजा

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सिस्टर अभया मामलाः कैथोलिक पादरी और नन को आजीवन कारावास की सजा

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  • Publish Date - December 23, 2020 / 11:26 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:00 PM IST

तिरुवनंतपुरम, 23 दिसंबर (भाषा) सीबीआई की यहां एक विशेष अदालत ने केरल के कोट्टायम में 28 साल पहले हुई सिस्टर अभया की हत्या के दोषी पाए गए कैथोलिक पादरी और नन को बुधवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

सीबीआई के विशेष न्यायाधीश के सनल कुमार ने कैथोलिक चर्च के फादर थॉमस कोट्टूर को आजीवन कारावास की दोहरी सजा सुनाई और उस पर 6.5 लाख रुपए जुर्माना लगाया, जबकि मामले की दूसरी दोषी सिस्टर सेफी को आजीवन कारावास और 5.5 लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई।

अदालत ने पादरी एवं नन को सिस्टर अभया की हत्या का मंगलवार को दोषी पाया था। यह मामला 21 वर्षीय अभया की संदिग्ध परिस्थिति में हुई मौत से संबंधित है। उनका शव 27 मार्च 1992 को सेंट पायस कॉन्वेंट के एक कुएं से मिला था।

पादरी और नन को सबूतों से छेड़छाड़ करने के मामले में भी सात-सात साल की सजा सुनाई गई है।

अदालत ने हालांकि कहा कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

फादर कुट्टूर को आईपीसी की धाराओं 302 और 449 के तहत हत्या और अपराध के लिए अवैध रूप से घर में घुसने के मामलों में आजीवन कारावास की दोहरी सजा सुनाई गई।

अदालत ने धारा 302 के तहत पांच लाख और अपराध के लिए अवैध रूप से घर में घुसने के मामले में पादरी पर एक लाख रुपए जुर्माना लगाया। उसे सबूतों से छेड़छाड़ करने के कारण आईपीसी की धारा 201 के तहत सात साल की कैद और 50,000 रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई।

सिस्टर सेफी को आईपीसी की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और उस पर पांच लाख रुपए जुर्माना लगाया गया। उसे सबूतों से छेड़छाड़ करने के कारण सात साल कारावास और 50,000 रुपए जुर्माने की सजा भी सुनाई गई।

अदालत ने मंगलवार को कहा था कि पादरी और नन के खिलाफ हत्या के आरोप साबित हुए हैं।

विस्तृत फैसला अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

दोषी जमानत पर रिहा थे और उन्हें कोविड-19 की जांच कराने के बाद न्यायिक हिरासत में ले लिया गया था। पुलिस ने फादर कोट्टूर को पूजापुरा की केंद्रीय जेल और सिस्टर सेफी को यहां अत्ताकुलनगारा महिला जेल भेजा था।

अभया कोट्टयम के बीसीएम कॉलेज में द्वितीय वर्ष की छात्रा थी और कॉन्वेंट में रहती थी।

इस मामले में अन्य आरोपी फादर जोस पुथ्रीक्कयील को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है।

शुरुआत में मामले की जांच स्थानीय पुलिस और राज्य की अपराध शाखा ने की थी और दोनों ने ही कहा था कि अभया ने खुदकुशी की है।

सीबीआई ने मामले की जांच 29 मार्च 1993 को अपने हाथ में ली और तीन क्लोजर रिपोर्ट दायर की थी तथा कहा था कि यह हत्या का मामला है लेकिन अपराधियों का पता नहीं चल सका है।

बहरहाल, चार सितंबर 2008 को केरल उच्च न्यायालय ने मामले को लेकर सीबीआई को फटकार लगाई थी और कहा था कि एजेंसी ‘अब भी राजनीतिक और नौकरशाही की ताकत रखने वालों की कैदी है’ तथा उसने सीबीआई की दिल्ली इकाई को निर्देश दिया था कि वह जांच को कोच्चि इकाई को सौंप दे।

इसके बाद सीबीआई ने 2008 में फादर कोट्टूर, फादर पूथ्रीक्कयील और नन सेफी को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।

अभियोजन के मुताबिक, कोट्टूर और पूथ्रीक्कयील का कथित रूप से सेफी से अवैध संबंध था।

सीबीआई के आरोप पत्र के मुताबिक, 27 मार्च 1992 की रात को अभया ने कोट्टूर और सेफी को कथित रूप से आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया जिसके बाद आरोपियों ने अभया पर कुल्हाड़ी से हमला किया और उसे कुएं में फेंक दिया।

भाषा सिम्मी नरेश

नरेश