नयी दिल्ली, 11 फरवरी (भाषा) राज्यसभा में बुधवार को कांग्रेस की एक सदस्य ने सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण किशोरों में उत्पन्न हो रहे मानसिक स्वास्थ्य संकट पर चिंता जताते हुए कहा कि युवा “वास्तविकता और कल्पना की दुनिया में अंतर नहीं कर पा रहे हैं।”
शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस की जे बी माथेर हीशम ने कहा कि हाल के सप्ताहों में ऑनलाइन मंचों के अत्यधिक उपयोग से उत्पन्न अकेलेपन और अलगाव की भावना के कारण छात्रों द्वारा कथित तौर पर आत्महत्या करने की घटनाएं सामने आई हैं।
हीशम ने कोच्चि के पास चोत्तानिक्करा की एक घटना का उल्लेख किया, जहां 16 वर्षीय एक लड़की ने कथित रूप से आत्महत्या कर ली और बताया गया कि वह अपने एक ऑनलाइन मित्र की मृत्यु के बाद गहरे सदमे में थी।
उन्होंने कहा कि उन्होंने सुबह उस छात्रा के शिक्षक और प्राचार्य से बातचीत की, जिन्होंने सोशल मीडिया के युवाओं और किशोरों पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की।
हीशम ने कहा, “बच्चे, किशोर और युवा वास्तविक और आभासी दुनिया में फर्क नहीं कर पा रहे हैं। वे सोशल मीडिया से प्रभावित होकर एक वर्चुअल दुनिया बना लेते हैं। ’’
उन्होंने देश में उपलब्ध कोरियाई विषय सामग्री, ऑनलाइन गेम और पॉप संस्कृति को लेकर भी चिंता जताई। गाजियाबाद में तीन बहनों की कथित आत्महत्या की घटना का जिक्र करते हुए हीशम ने कहा कि इसका संबंध भी कथित रूप से कोरियाई कंटेंट से बताया गया था।
उन्होंने कहा, “ये सभी घटनाएं मुझे यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि जिन बच्चों को खेलना, हंसना, सीखना और शिक्षकों से कौशल प्राप्त करना चाहिए, वे आत्महत्या जैसे गंभीर कदम उठा रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि हालिया आंकड़ों में व्यवहार संबंधी बदलाव, साइबर धमकी और आत्महत्या की प्रवृत्ति में वृद्धि देखी गई है।
हीशम ने कहा कि सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए और शिक्षा प्रणाली में मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों को अकादमिक पाठ्यक्रम के साथ एकीकृत करने की आवश्यकता पर पर विचार करना चाहिए।
भाषा
मनीषा माधव
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