नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) सरकार ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि एम्स, नयी दिल्ली में डिस्पोजेबल सिरिंज के कुछ बैच को गुणवत्ता संबंधी शिकायतों के कारण एहतियाती उपाय के तौर पर वापस मंगा लिया गया।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने एक सवाल के लिखित जवाब में कहा, ‘‘एम्स, नयी दिल्ली में डिस्पोजेबल सिरिंज के कुछ बैच को उपयोगकर्ता विभागों की गुणवत्ता संबंधी शिकायतों के कारण 2026 में एहतियाती एवं रोगी सुरक्षा उपाय के रूप में वापस मंगा लिया गया।’’
उन्होंने बताया कि प्रभावित बैच का निर्माण मैसर्स नोबल फार्माकेयर लिमिटेड और मैसर्स वीके सर्जिकल्स द्वारा किया गया था।
मंत्री ने बताया कि प्रभावित बैच के कारण किसी भी रोगी के स्वास्थ्य पर असर पड़ने की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि दोनों कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं तथा दोषपूर्ण बैच को नए बैच से प्रतिस्थापित कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) खरीद और गुणवत्ता निरीक्षण के कड़े प्रोटोकॉल का पालन करता है, जिसमें खरीद और आपूर्ति के समय नमूने एकत्र करना एवं निरीक्षण शामिल हैं। एक निरीक्षण समिति प्राप्त आपूर्तियों की तुलना निविदा प्रक्रिया के दौरान प्रस्तुत नमूनों से करती है तथा अनुमोदित विनिर्देशों के अनुरूप न पाए जाने वाले किसी भी बैच को अस्वीकार कर दिया जाता है।
मंत्री के अनुसार इसके अलावा, ऐसे मामलों के मूल कारण का विश्लेषण तथा सुधार का सुझाव देने के लिए रोगी सुरक्षा एवं गुणवत्ता प्रकोष्ठ नामक एक विशेष इकाई की स्थापना की गई है।
उन्होंने एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि भारत सरकार, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन के माध्यम से औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथा उसके तहत बनाए गए नियमों के प्रावधानों के अनुसार दवाइयों की सुरक्षा, प्रभावकारिता एवं गुणवत्ता का विनियमन करती है। औषधियों के विक्रय एवं वितरण का विनियमन राज्य लाइसेसिंग प्राधिकरणों द्वारा किया जाता है।
मंत्री ने कहा कि प्रतिरोगाणु औषधियों की सरल पहचान सुनिश्चित करने तथा उनके तर्कसंगत एवं विवेकपूर्ण उपयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से औषधि नियम, 1945 में नीली पट्टी लेबलिंग संबंधी संशोधन के लिए इस साल 21 जनवरी को एक प्रारूप अधिसूचना जारी की गई थी।
भाषा अविनाश सुभाष
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