गौरतलब है कि दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और 21 अन्य लोगों को शराब नीति मामले में बरी कर दिया। अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच पर नाराजगी जताते हुए कहा कि एजेंसी का मामला न्यायिक समीक्षा में पूरी तरह विफल रहा। इस मामले में बरी किए गए अन्य 21 आरोपियों में तेलंगाना जागृति की अध्यक्ष के. कविता भी शामिल हैं। अदालत ने सभी आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में राहत दी।
विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह ने कहा, “इस अदालत को यह मानने में कोई हिचकिचाहट नहीं है कि रिकॉर्ड में रखी गई जानकारी से किसी भी आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया भी कोई मामला नहीं बनता और न ही कोई गंभीर संदेह है। इसलिए आरोपी संख्या 1 से 23 को उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों से बरी किया जाता है।”
सीबीआई आम आदमी पार्टी (आप) की पूर्ववर्ती सरकार द्वारा अब रद्द की जा चुकी आबकारी नीति के निर्माण और क्रियान्वयन में कथित भ्रष्टाचार की जांच कर रही थी। एजेंसी ने संकेत दिया है कि वह इस फैसले के खिलाफ तत्काल दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील दायर करेगी। (Special Judge Jitendra Singh) सीबीआई प्रवक्ता ने कहा कि जांच के कई महत्वपूर्ण पहलुओं की या तो अनदेखी की गई या उन्हें उचित तरीके से परखा नहीं गया। वहीं अदालत ने अपने आदेश में टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है कि जांच पूर्व निर्धारित दिशा में आगे बढ़ी, जिसमें नीति निर्माण या कार्यान्वयन से जुड़े लगभग हर व्यक्ति को आरोपित कर एक कमजोर कहानी को विश्वसनीयता देने की कोशिश की गई।
भावुक हुए अरविंद केजरीवाल
न्यायाधीश ने यह भी कहा कि इन आरोपों को गोवा विधानसभा चुनावों से जोड़ना कानूनी तथ्यों से अधिक धारणाओं पर आधारित है। उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार नीति विस्तृत विचार-विमर्श के बाद तैयार की गई थी। फैसला सुनाए जाने के बाद पत्रकारों से बातचीत में अरविंद केजरीवाल भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला स्वतंत्र भारत के इतिहास की “सबसे बड़ी राजनीतिक साजिश” था। उन्होंने कहा कि अदालत ने साबित कर दिया है कि वे, मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी “कट्टर ईमानदार” हैं।
इस मामले में केजरीवाल करीब छह महीने जेल में रहे, जबकि सिसोदिया लगभग डेढ़ वर्ष तक कारावास में रहे। (Special Judge Jitendra Singh) अदालत ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों से स्पष्ट है कि नीति निर्माण की प्रक्रिया पारदर्शी थी और उपराज्यपाल से सुझाव लेने की कोई कानूनी बाध्यता न होने के बावजूद सुझाव मांगे गए, उन पर विचार किया गया और उन्हें शामिल भी किया गया। अदालत ने यह भी कहा कि स्वीकार्य साक्ष्यों के अभाव में किसी आरोपी को आपराधिक मुकदमे की कठिनाइयों से गुजरने के लिए बाध्य करना न्यायोचित नहीं है।
AAP national convener and former Delhi CM Arvind Kejriwal became emotional after being discharged in the Delhi Excise Policy case by Rouse Avenue Court, stating that the verdict proves he and Manish Sisodia are honest.#ArvindKejriwal #ExcisePolicyCase #RouseAvenueCourt #AAPNews… pic.twitter.com/iWVUOiiwH1
— Pune Mirror (@ThePuneMirror) February 27, 2026