State Universities Amendment Bill passed: अब खुद विश्वविद्यालय कर सकेंगे प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्ति.. स्टेट यूनिवर्सिटीज (अमेंडमेंट) बिल सदन में पास

हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने स्टेट यूनिवर्सिटीज अमेंडमेंट बिल 2026 पास कर दिया। नई व्यवस्था में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया और वित्तीय निगरानी बदलेगी।

State Universities Amendment Bill passed: अब खुद विश्वविद्यालय कर सकेंगे प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्ति.. स्टेट यूनिवर्सिटीज (अमेंडमेंट) बिल सदन में पास

State Universities Amendment Bill passed || Image- DPR HP File

Modified Date: September 3, 2026 / 09:47 am IST
Published Date: September 3, 2026 9:46 am IST
HIGHLIGHTS
  • हिमाचल विधानसभा ने यूनिवर्सिटी बिल पास किया
  • भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव होगा
  • विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर उठे सवाल

शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने बुधवार को हिमाचल प्रदेश स्टेट यूनिवर्सिटीज (अमेंडमेंट) बिल 2026 को ध्वनिमत से पास कर दिया। (State Universities Amendment Bill passed) बिल के पास होने के दौरान बीजेपी विधायकों ने इसका विरोध किया। (State Universities Amendment Bill passed in Himachal Pradesh) वहीं विश्वविद्यालयों के शिक्षकों ने भी भर्ती व्यवस्था में बदलाव के खिलाफ प्रदर्शन किया।

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यूनिवर्सिटी में भर्ती व्यवस्था बदलेगी

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बिल का बचाव करते हुए कहा कि इसका मकसद विश्वविद्यालयों में भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना है। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था से नियुक्तियों में राजनीतिक दखलंदाजी और सिफारिशों की गुंजाइश खत्म होगी। नए सिस्टम में विश्वविद्यालय प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की नियुक्ति कर सकेंगे। वहीं दूसरे पदों पर भर्ती हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग और स्टेट सेलेक्शन कमीशन के जरिए की जाएगी।

वित्तीय मामलों में भी बढ़ेगी निगरानी

मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालयों के फाइनेंशियल वर्क में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए भी बदलाव किए गए हैं। इस बदलाव के तहत राज्य सरकार के वित्त सचिव को विश्वविद्यालयों की वित्त समिति का अध्यक्ष बनाया जाएगा। (State Universities Amendment Bill passed in Himachal Pradesh) सुक्खू के मुताबिक, सरकार विश्वविद्यालयों के वित्तीय मामलों और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता चाहती है, जबकि विश्वविद्यालयों के अन्य कामकाज में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।

BJP और शिक्षकों ने किया विरोध

बिल का बीजेपी विधायकों के साथ-साथ CPI(M) और हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने भी विरोध किया। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को HPPSC के अधीन करने से विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता प्रभावित होगी। CPI(M) के प्रदेश सचिव संजय चौहान ने मांग की कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में वर्ष 2020 से 2023 के बीच नियुक्त किए गए 186 शिक्षकों की भर्ती की स्वतंत्र और समयबद्ध न्यायिक जांच कराई जाए।

186 शिक्षकों की नियुक्ति पर सवाल

संजय चौहान ने CAG की कंप्लायंस ऑडिट रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि 186 शिक्षकों की नियुक्तियों में EWS प्रमाणपत्र, शैक्षणिक योग्यता और अन्य दस्तावेजों के सत्यापन से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए गए थे। ऑडिट में UGC नियमों के पालन को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। (State Universities Amendment Bill passed in Himachal Pradesh) इसमें एक असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति का उल्लेख किया गया, जिसके पास आवेदन की अंतिम तारीख तक निर्धारित योग्यता नहीं होने की बात सामने आई थी। एक गेस्ट फैकल्टी की पात्रता पर भी सवाल उठाया गया था।

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शिक्षकों ने कहा- विश्वविद्यालय की स्वायत्तता प्रभावित होगी

HPUTWA ने बिल के विरोध में प्रदर्शन किया। संगठन के अध्यक्ष प्रोफेसर नितिन व्यास ने कहा कि नई व्यवस्था से विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता, संस्थागत पहचान और अकादमिक स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। संगठन के सचिव डॉ. अंकुश भारद्वाज ने भी भर्ती अधिकारों को विश्वविद्यालयों से बाहर करने पर चिंता जताई। (State Universities Amendment Bill passed) उन्होंने शिक्षकों और कर्मचारियों से लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से इस फैसले का विरोध करने की अपील की। बीजेपी विधायकों, CPI(M) और विश्वविद्यालय शिक्षकों के विरोध के बावजूद विधानसभा ने बिल को ध्वनिमत से पारित कर दिया।

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