राज्य का दर्जा वापस आएगा, अनुच्छेद 370 नहीं: मीरवाइज के बयान पर जम्मू-कश्मीर भाजपा

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राज्य का दर्जा वापस आएगा, अनुच्छेद 370 नहीं: मीरवाइज के बयान पर जम्मू-कश्मीर भाजपा

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  • Publish Date - August 30, 2026 / 01:55 PM IST,
    Updated On - August 30, 2026 / 01:55 PM IST

श्रीनगर, 30 अगस्त (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जम्मू-कश्मीर इकाई ने रविवार को कश्मीर के मुख्य मौलाना मीरवाइज उमर फारूक के उस बयान पर निशाना साधा, जिसमें उन्होंने राजनीतिक दलों से अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए एकजुट होने की अपील की थी। भाजपा ने कहा कि इस तरह के बयान लोगों को उकसाने और घाटी में वर्षों की हिंसा के बाद बने शांतिपूर्ण माहौल को बिगाड़ने का प्रयास हैं।

भाजपा प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि संसद ने पांच अगस्त, 2019 को एक ‘ऐतिहासिक’ संवैधानिक फैसला लिया था और बाद में उच्चतम न्यायालय ने भी अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले को बरकरार रखा।

ठाकुर ने कहा, ‘‘मीरवाइज उमर फारूक को समझना चाहिए कि अनुच्छेद 370 वापस नहीं आएगा। संसद ने अनुच्छेद 370 को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है और कोई भी राजनीतिक दल, नेता या दबाव समूह इस संवैधानिक वास्तविकता को बदल नहीं सकता।’’

उन्होंने कहा कि इस तरह की मांगें कश्मीर को फिर से पुरानी राजनीति की ओर ले जाने का जोखिम पैदा करती हैं।

ठाकुर ने कहा, ‘‘इस तरह के बयान लोगों को भड़काने और घाटी के शांतिपूर्ण माहौल को फिर से खराब करने के लिए दिए जाते हैं। इसकी अनुमति कभी नहीं दी जाएगी। कश्मीर में शांति लौटने के लिए देश ने बहुत बड़ी कीमत चुकाई है। हमारे बहादुर सुरक्षा बलों और उन नागरिकों, जिनमें राजनीतिक कार्यकर्ता भी शामिल हैं, के बलिदान को राजनीतिक हितों से प्रेरित बयानों के जरिए कमजोर नहीं किया जा सकता।’’

उन्होंने कहा कि कश्मीर ने पर्याप्त खून-खराबा, बंद, पथराव और अव्यवस्था देखी है तथा लोगों को फिर से अस्थिरता के दौर में नहीं धकेला जाना चाहिए।

ठाकुर ने कहा, ‘‘जो लोग पुराने मतभेदों को फिर से हवा देने की कोशिश कर रहे हैं उन्हें समझना चाहिए कि कश्मीर आगे बढ़ चुका है। हमारे युवा शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता, निवेश, पर्यटन और अवसर चाहते हैं। वे उस दौर में वापस नहीं जाना चाहते जब बंद के कैलेंडर उनकी जिंदगी तय करते थे और हिंसा भविष्य को नियंत्रित करती थी।’’

ठाकुर ने कहा, ‘‘लोकतंत्र हर व्यक्ति को बोलने और भागीदारी का अधिकार देता है, लेकिन लोकतंत्र का मतलब यह नहीं है कि देश की सर्वोच्च अदालत द्वारा बरकरार रखे गए संवैधानिक फैसले को बार-बार पलटने की मांग की जाए।’’

भाषा शोभना वैभव

वैभव