उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने बाढ़ रोकने के लिए केरलम की नदियों की गहरायी बढ़ाने का आग्रह किया

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उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने बाढ़ रोकने के लिए केरलम की नदियों की गहरायी बढ़ाने का आग्रह किया

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  • Publish Date - August 30, 2026 / 02:17 PM IST,
    Updated On - August 30, 2026 / 02:17 PM IST

अलप्पुझा (केरलम), 30 अगस्त (भाषा) भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने रविवार को अधिकारियों से केरलम में बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए नदियों की गहराई बढ़ाने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने कहा कि लोगों को पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को लेकर ‘कट्टर’ नहीं होना चाहिए।

वह यहां मलयालम दैनिक अखबार केरल कौमुदी के 115वें स्थापना वर्ष समारोह को संबोधित कर रहे थे।

राधाकृष्णन रविवार को केरलम पहुंचे और वह दो दिन तक विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘केरलम के सामने एक बड़ी समस्या आ रही है : नदियों की गहराई कम होती जा रही है, क्योंकि नियमित अंतराल पर रेत नहीं निकाली जा रही है। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि सारी रेत एक साथ निकाल दी जाए, लेकिन नियमित अंतराल पर रेत निकाली जानी चाहिए, ताकि नदी की गहराई बनी रहे। वरना पानी जाएगा कहां?’’

उन्होंने कहा कि नदियों की गहराई बढ़ाना जरूरी है।

राधाकृष्णन ने कहा, ‘‘हमें पर्यावरण समेत किसी भी मुद्दे को लेकर कट्टर नहीं होना चाहिए। हमें हर चीज का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करना हमेशा विकास के हित के खिलाफ जाएगा।’’

उन्होंने कहा कि केरलम को पर्यावरण की रक्षा करते हुए औद्योगिक, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में दूसरे राज्यों के साथ कदम मिलाकर आगे बढ़ना चाहिए।

राधाकृष्णन ने बताया कि राज्य में हाल में आई बाढ़ के बाद उन्होंने केरल के सांसदों से नदियों को गहरा करने पर विचार करने को कहा था।

उन्होंने कहा कि अनिश्चित और बदलती बारिश की प्रवृत्ति ने एक और बड़ी समस्या पैदा कर दी है जहां लंबे समय तक बारिश नहीं होती और फिर रातभर में भारी बारिश हो जाती है।

राधाकृष्णन ने पत्रकारों से ऐसे मुद्दों के बारे में जागरूकता पैदा करने और इनके समाधान की जरूरत पर लिखने का आग्रह किया।

राधाकृष्णन ने राज्य का नाम बदलकर केरलम किए जाने पर लोगों को बधाई दी।

उन्होंने कहा, ‘‘12 अगस्त 2026 को जब यह विधेयक पारित हुआ, तब मैं राज्यसभा की अध्यक्षता कर रहा था। मैं हर केरलवासी को इस नए नाम के लिए बधाई देता हूं, क्योंकि यह केरलम की संस्कृति को दर्शाता है। मैं सभी सदस्यों के चेहरों पर खुशी देख सकता था कि एक ऐतिहासिक गलती अब सुधारी जा रही थी।’’

राधाकृष्णन ने देश के लिए केरलम के तीन प्रमुख योगदानों का भी उल्लेख किया और इस दौरान उन्होंने आदि शंकराचार्य, श्री नारायण गुरु और मन्नथु पद्मनाभन का जिक्र किया।

उन्होंने कहा, ‘‘अगर आदि शंकराचार्य नहीं होते तो मुझे नहीं लगता कि आज अखंड भारत होता। और अगर नारायण गुरु नहीं होते तो हमारे बीच समानता नहीं होती। तीसरे हैं मन्नथु पद्मनाभन, जो एक महान समाज सुधारक भी थे। उन्होंने शिक्षा को बहुत महत्व दिया और चाहते थे कि हर व्यक्ति शिक्षित हो।’’

उन्होंने कहा कि ऐसे समाज सुधारकों के प्रयासों के कारण केरलम देश का पहला 100 प्रतिशत साक्षर राज्य बना। उन्होंने नारायण गुरु को ‘‘आधुनिक इतिहास के महानतम संतों और समाज सुधारकों में से एक’’ बताया।

केरल कौमुदी के 115 वर्षों के दौरान पत्रकारिता और उसकी नैतिकता को बनाए रखने की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि पत्रकारिता ने राजनीतिक जागरूकता पैदा करने, सामाजिक सुधारों को बढ़ावा देने, स्थापित परंपराओं पर सवाल उठाने और आम लोगों को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का मंच देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

राधाकृष्णन ने कहा कि पिछले दो दशकों में मीडिया का स्वरूप काफी बदल गया है और अब खबरें तुरंत लोगों तक पहुंच जाती हैं, वहीं स्मार्टफोन ने लगभग हर नागरिक को प्रकाशक बना दिया है।

इस मौके पर केरलम के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कहा कि मौजूदा समय में समाज को संघर्ष, टकराव और विरोध की जरूरत नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे समाज को एक साथ बैठने, चर्चा करने, बहस करने और शांत एवं संयमित मन से समाधान खोजने की जरूरत है। और केरल कौमुदी इतने वर्षों से ठीक यही काम करता आ रहा है।’

उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन ने मौजूदा दौर में तथ्यों की जांच के महत्व पर जोर दिया और समाज पर सोशल मीडिया के प्रभाव के बारे में बात की।

उपराष्ट्रपति ने हाल में पद्म पुरस्कार से सम्मानित एसएनडीपी योगम के महासचिव वेल्लापल्ली नटेसन को भी सम्मानित किया।

भाषा गोला वैभव

वैभव