असम में टोल टैक्स की वसूली रोकें, सड़कों का ऑडिट कराएं: कांग्रेस नेता की गडकरी से मांग

असम में टोल टैक्स की वसूली रोकें, सड़कों का ऑडिट कराएं: कांग्रेस नेता की गडकरी से मांग

Modified Date: August 31, 2026 / 08:51 pm IST
Published Date: August 31, 2026 8:51 pm IST

गुवाहाटी, 31 अगस्त (भाषा) असम में राष्ट्रीय राजमार्ग-27 (एनएच-27) पर हुए एक भीषण हादसे के एक दिन बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता देवव्रत सैकिया ने सोमवार को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखकर राज्य में टोल संग्रह को तुरंत रोकने और उन सभी सड़कों का व्यापक ऑडिट कराने की मांग की, जहां वाहन चालकों से शुल्क वसूला जाता है।

असम विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष सैकिया ने कामरूप मेट्रोपॉलिटन जिले के सोनापुर में एक मिनीबस और ट्रक की टक्कर का हवाला दिया, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई। उन्होंने कहा कि यह घटना सड़क का उपयोग करने वाले यात्रियों के सामने मौजूद खतरों का एक दुखद उदाहरण है।

सैकिया ने पत्र में कहा, “…यह कोई अकेली घटना नहीं है। असम में अन्य टोल मार्गों से भी गड्ढों से भरी सड़कों, खराब रखरखाव और बार-बार होने वाले हादसों की खबरें आ रही हैं, जबकि टोल टैक्स की वसूली लगातार जारी है।”

कांग्रेस नेता ने रेखांकित किया कि जनता से उन सड़कों के लिए टोल देने को कहा जा रहा है जो “असुरक्षित हैं और खराब स्थिति में हैं”।

उन्होंने कहा कि यह स्थिति टोल संग्रह के मूल उद्देश्य के विपरीत है और अदालतों द्वारा तय किए गए उस सिद्धांत का भी उल्लंघन है, जिसके तहत ठीक से व्यवस्थित न रखी गई सड़कों पर टोल शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए।

सैकिया ने केंद्रीय मंत्री से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि जब तक सड़कों की मरम्मत नहीं हो जाती और उन्हें आवाजाही के योग्य प्रमाणित नहीं कर दिया जाता, तब तक असम में टोल संग्रह पर तत्काल रोक लगाई जाए।

उन्होंने असम के सभी टोल संग्रह केंद्रों और टोल वाली सड़कों का एक “स्वतंत्र सुरक्षा एवं रखरखाव ऑडिट” कराने की मांग की।

इसके साथ ही उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), रियायतधारकों और स्वतंत्र इंजीनियरों से जुड़े रखरखाव में लापरवाही, बार-बार होने वाली दुर्घटनाओं और अनुबंध संबंधी खामियों की विस्तृत जांच की मांग की।

सैकिया ने सोनापुर हादसे और टोल वाली सड़कों पर हुई अन्य दुर्घटनाओं के मृतकों के परिवारों व घायलों के लिए तत्काल राहत और मुआवजे की मांग की।

भाषा सुमित प्रशांत

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