नयी दिल्ली, 24 जनवरी (भाषा)राष्ट्रीय राजधानी में अगले महीने आयोजित की किये जा रहे तीन दिवसीय एक सम्मेलन में रणनीतिक विशेषज्ञ, नीति निर्माता और उद्यमी रक्षा क्षेत्र में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के उपयोग पर मंथन करेंगे।
डेफसैट-2026 सम्मेलन 24 से 26 फरवरी तक यहां मानेकशॉ सेंटर में आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन के चौथे संस्करण का विषय ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के केंद्र में अंतरिक्ष’ है।
एसआईए-इंडिया के अध्यक्ष सुब्बाराओ पावुलुरी ने एक बयान में कहा, ‘‘डेफसैट 2026 का उद्देश्य सोच में एक आवश्यक बदलाव लाना है। अंतरिक्ष को महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के रूप में मान्यता देना और साथ ही एक सुसंगत अंतरिक्ष-सैन्य सिद्धांत को स्पष्ट करना है।’’
पावुलुरी ने कहा, ‘‘आज के सुरक्षा परिवेश में, लचीलापन व्यवधान से बचने से नहीं, बल्कि ऐसी प्रणालियों को डिजाइन करने से बनता है जो दबाव में भी कार्य कर सकें और अनुकूलन कर सकें।’’
इस सम्मेलन में सशस्त्र बलों, सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत और राजनयिक समुदाय के 1,000 से अधिक हितधारक, जिनमें वैश्विक रक्षा अताशे भी शामिल हैं। सभी प्रतिभागी भारत के रक्षा-अंतरिक्ष सिद्धांत के लिए एक दूरदर्शी खाका पर विचार-विमर्श करने के लिए एकत्रित होंगे।
एसआईए-इंडिया ने हाल ही में सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल पी जे एस पन्नू के नेतृत्व में सामरिक रक्षा अंतरिक्ष समूह (एसएसजी) का गठन किया है, जो भारत की दीर्घकालिक सैन्य अंतरिक्ष तैयारियों का मार्गदर्शन करने और अंतरिक्ष को युद्ध और सुरक्षा क्षेत्र के रूप में संस्थागत रूप देने के लिए एक उच्च स्तरीय, बहु-हितधारक निकाय के रूप में कार्य करेगा।
एसआईए-इंडिया के महानिदेशक अनिल प्रकाश ने कहा, ‘‘रणनीतिक रक्षा अंतरिक्ष समूह रणनीतिक सहयोग और वैश्विक संवाद को सिद्धांत, क्षमता और परिचालन तत्परता में बदलने के लिए एक तंत्र को संस्थागत रूप देता है।’’
आंतरिक सुरक्षा, गृह सुरक्षा और नागरिक रक्षा अभियानों पर समर्पित डेफसैट सत्रों में इस बात पर विचार किया जाएगा कि कैसे एकीकृत, अंतरिक्ष-सक्षम ढांचे इन क्षेत्रों में समन्वय, निर्णय लेने और परिचालन निरंतरता को मजबूत कर सकते हैं।
भाषा धीरज माधव
माधव