विद्यार्थी केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के वाहक है: न्यायमूर्ति सौमित्र सैकिया

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विद्यार्थी केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के वाहक है: न्यायमूर्ति सौमित्र सैकिया

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  • Publish Date - May 18, 2026 / 10:26 AM IST,
    Updated On - May 18, 2026 / 10:26 AM IST

गुवाहाटी, 18 मई (भाषा) गुवाहाटी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सौमित्र सैकिया ने विद्यार्थियों को ‘‘सामाजिक परिवर्तन के वाहक’’ बताते हुए उनसे संवैधानिक मूल्यों तथा स्थानीय ज्ञान पर आधारित नवाचार को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

न्यायमूर्ति सैकिया टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) के गुवाहाटी स्थित परिसर में 2025 में स्नातक कर चुके विद्यार्थियों के लिए रविवार को आयोजित दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।

संस्थान की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार ‘कृष्णा कांत हांडीकी स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी’ (केकेएचएसओयू) के जुबिन गर्ग सभागार में आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए न्यायमूर्ति सैकिया ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे टीआईएसएस ने दशकों से भारत के बौद्धिक और सार्वजनिक जीवन में एक विशिष्ट स्थान अर्जित किया है, जिसके योगदान ने संस्थागत दीवारों से परे समाज को आकार दिया है।

उन्होंने कहा, ‘‘पूर्वोत्तर के प्रति दूरदर्शी प्रतिबद्धता के साथ स्थापित इस संस्था के गुवाहाटी ‘ऑफ-कैंपस’ को असाधारण ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व का दर्जा प्राप्त है।’’

उन्होंने स्नातक विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा, ‘‘वे न केवल डिग्री धारक हैं, बल्कि ज्ञान के संरक्षक और सामाजिक परिवर्तन के वाहक भी हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘भारत का संविधान केवल एक कानूनी ढांचा नहीं है, बल्कि एक नैतिक अनुबंध है जो इस राष्ट्र को एकजुट करता है और न्याय का वादा करता है।’’

न्यायमूर्ति सैकिया ने विद्यार्थियों से संवैधानिक मूल्यों तथा स्थानीय ज्ञान पर आधारित नवाचार को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

समारोह में टीआईएसएस के कुलाधिपति डी. पी. सिंह, कुलपति बद्री नारायण तिवारी, कार्यवाहक रजिस्ट्रार नरेंद्र मिश्रा तथा डीन सुनील डी. संथा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

कुलाधिपति सिंह ने कहा, ‘‘ज्ञान को वास्तविक जीवन और वास्तविक समुदायों से जुड़ा होना चाहिए, न कि केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित रहना चाहिए।’’

कुलपति बद्री नारायण तिवारी ने कहा, ‘‘आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के इस युग में, टीआईएसएस एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है, क्योंकि हम अपने अस्तित्व के 90वें वर्ष का जश्न मना रहे हैं और शैक्षणिक उत्कृष्टता व राष्ट्र के लिए सार्थक योगदान की दिशा में निरंतर प्रयासरत हैं।’’

संस्थान के अनुसार, इस वर्ष तीन शोधार्थियों को सामाजिक विज्ञान में पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई। वहीं, 102 छात्रों को एमए और एमएएसडब्ल्यू तथा 11 छात्रों को ‘बैचलर ऑफ आर्ट्स इन सोशल साइंसेज’ (बीएएसएस) की डिग्री दी गई।

समारोह में विभिन्न पाठ्यक्रमों के 27 छात्रों को पदक और शील्ड भी प्रदान किए गए।

परिसर के निदेशक जगन्नाथ अम्बागुडिया ने वार्षिक रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि संस्थान को हाल में संसद की स्थायी समिति से भी सराहना मिली है।

भाषा

खारी वैभव

वैभव