सीबीएसई की त्रि-भाषा नीति के क्रियान्वयन में सुझावों पर अमल किया जा रहा है: केंद्र

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सीबीएसई की त्रि-भाषा नीति के क्रियान्वयन में सुझावों पर अमल किया जा रहा है: केंद्र

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  • Publish Date - September 3, 2026 / 05:26 PM IST,
    Updated On - September 3, 2026 / 05:26 PM IST

(फाइल फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, तीन सितंबर (भाषा) केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि वह नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए दो भारतीय भाषाओं समेत तीन भाषाएं पढ़ने की केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की नीति को लागू करने के बारे में उसके सुझावों पर काम कर रही है।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की खंडपीठ को बताया कि सीबीएसई अलग-अलग तौर-तरीकों पर काम कर रहा है। उन्होंने इसके लिए समय मांगा।

उच्चतम न्यायालय ने भाटी की बात पर गौर किया और मामले की सुनवाई एक हफ़्ते के लिए टाल दी।

शीर्ष अदालत ने 20 अगस्त को कहा था कि बच्चों पर दबाव नहीं पड़ना चाहिए। शीर्ष अदालत ने सीबीएसई की नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए त्रि-भाषा नीति से जुड़ी समस्याओं का समाधान खोजने पर बल दिया था।

उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि नीति लाने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन याचिकाकर्ताओं को सिर्फ इस बात की चिंता थी कि इसे किस तरह से लागू किया जा रहा है।

खंडपीठ ने कहा था, ‘‘आप इनमें से कुछ समस्याओं पर फिर से विचार कर सकते हैं। इसमें कोई शक नहीं कि देर-सबेर इसे लागू करना ही होगा; इसमें कुछ भी गलत नहीं है। लेकिन इसे कैसे बेहतर ढंग से लागू किया जाए ताकि जो भी रुकावटें या बाधाएं आ रही हैं, उनका कोई समाधान निकाला जा सके।’’

शीर्ष अदालत ने कहा था कि एक बात जिस पर विचार किया जाना था, वह यह थी कि उपलब्ध भाषा विकल्पों के लिए पर्याप्त मानव संसाधन ढांचा कैसे तैयार किया जाए।

शीर्ष अदालत 27 मई को इस नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने के लिए सहमत हो गई थी तथा उसने केंद्र, सीबीएसई एवं राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा था।

सीबीएसई के एक परिपत्र के अनुसार एक जुलाई से नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य कर दी गई है, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होनी चाहिए।

यह कदम सीबीएसई द्वारा अपनी पढ़ाई की योजना को ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020’ और ‘राष्ट्रीय स्कूली शिक्षा पाठ्यचर्या प्रारुप 2023’ के अनुरूप बनाने की कोशिश का हिस्सा है।

पंद्रह मई को जारी परिपत्र के अनुसार, जो विद्यार्थी विदेशी भाषा चुनना चाहते हैं, वे ऐसा तभी कर सकते हैं जब वे पहले दो भारतीय भाषाएं पढ़ रहे हों या वे फिर अतिरिक्त चौथी भाषा के तौर पर ले सकते हैं।

परिपत्र में कहा गया है,‘‘ एक जुलाई 2026 से नौवीं कक्षा के लिए तीन भाषाएं (आर1,आर2, आर3) पढ़ना अनिवार्य होगा, जिनमें से कम से कम दो भाषाएं भारतीय भाषाएं होनी चाहिए।’’

बोर्ड ने कहा है कि जब तक खास आर3 पाठ्यपुस्तक उपलब्ध नहीं हो जातीं, तब तक नौवीं कक्षा के विद्यार्थी चुनी हुई भाषा की छठी की आर3 पाठ्यपुस्तक (2026-27 संस्करण) का इस्तेमाल करेंगे।

भाषा राजकुमार नरेश

नरेश