जयपुर, 11 मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया संकट के चलते वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित होने से राजस्थान में होटल, रेस्तरां, फैक्टरियां, शादी समारोहों के कैटरर्स और पर्यटन प्रतिष्ठान दैनिक संचालन में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
घरेलू और वाणिज्यिक गैस उपभोक्ता सिलेंडर सुरक्षित करने के लिए गैस एजेंसियों का चक्कर लगाते देखे गए। वाणिज्यिक सिलेंडरों की नई बुकिंग नहीं हो रही है, जिससे विभिन्न उद्योग प्रभावित हुए हैं।
उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि संकट ने उन क्षेत्रों में अनिश्चितता पैदा कर दी है जो एलपीजी पर अत्यधिक निर्भर हैं।
रेस्तरां मालिकों का कहना है कि रसोई पहले से ही प्रभावित हो रही है और शादी समारोहों का खर्च भी गैस की कमी के कारण बढ़ने वाला है।
‘जयपुर कैटरिंग डीलर्स कमेटी’ के अनुसार, शहर में करीब 6,000 से 7,000 रेस्तरां और ढाबे वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों पर निर्भर हैं, इसके अलावा कई छात्रावास रसोईघर, ‘मैस’ सुविधाएं और हाईवे ढाबे भी रोजाना खाना बनाने के लिए इन सिलेंडरों का उपयोग करते हैं।
कुछ रेस्तरां संचालक अब कोयला भट्ठी, डीजल बर्नर का सहारा लेने पर विचार कर रहे हैं।
‘राजस्थान टेंट डीलर्स एसोसिएशन’ के अध्यक्ष रवि जिंदल ने कहा कि सिलेंडरों की कमी से शादी का खर्च 25,000 से 30,000 रुपये तक बढ़ सकता है।
‘अलवर ट्रेड फेडरेशन’ के अध्यक्ष हरमीत सिंह ने कहा कि फैक्टरियां ‘वेल्डिंग’ और ‘कटिंग’ कार्य के लिए गैस पर निर्भर हैं, यदि गैस उपलब्ध नहीं हुई तो उत्पादन रुक जाएगा।
‘अलवर ऑटो कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग सोसाइटी’ के प्रतिनिधि राहुल गुप्ता ने कहा कि कंटेनर मालभाड़ा बढ़ गया है और उपलब्धता कम हो गई है।
खाद्य प्रसंस्करण व्यवसायों ने बताया कि पश्चिम एशिया के कुछ बाजारों से मांग कमजोर हो गई है, ऐसे में हल्दी के निर्यात पर असर पड़ सकता है।
जयपुर के गोविंदगढ़ औद्योगिक क्षेत्र में बोरोसिल की क्रॉकरी निर्माण इकाई में उत्पादन बंद हो गया है।
जयपुर, उदयपुर, जैसलमेर और जोधपुर जैसे गंतव्यों में होटल और रेस्तरां वाणिज्यिक सिलेंडरों पर पूरी तरह निर्भर हैं।
उदयपुर के होटल मालिक राजेश अग्रवाल ने कहा कि संकट केवल एक उद्योग को प्रभावित नहीं करेगा, बल्कि बाजार में धन का प्रवाह घटेगा और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा।
भाषा बाकोलिया राजकुमार
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