नयी दिल्ली, आठ मई (भाषा) आम आदमी पार्टी (आप) की गुजरात इकाई द्वारा उसके सोशल मीडिया खातों के निलंबन को चुनौती देने वाली याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र से जवाब मांगा।
न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक आराधे की पीठ ने याचिका पर नोटिस जारी किया और इसे अन्य समान लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ दिया, जिनमें उपयोगकर्ता को नोटिस जारी किए बिना सोशल मीडिया खातों और पोस्ट को ‘ब्लॉक’ करने की कार्रवाई को चुनौती दी गई है।
संक्षिप्त सुनवाई के दौरान, वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासात ने तर्क दिया कि अधिकारियों द्वारा लगायी गयी सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3)(बी), लागू नहीं है क्योंकि यह मध्यस्थ के लिए एक सुरक्षित आश्रय प्रावधान है।
उन्होंने कहा कि लंबित याचिका में मुद्दे एक-दूसरे से मिलते-जुलते हैं, लेकिन समान नहीं हैं।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने निवेदन किया कि केंद्र को नोटिस जारी करना आवश्यक नहीं हो सकता है और याचिका की एक प्रति तामील करने की अनुमति दी जा सकती है।
याचिका में, पार्टी ने उसके सोशल मीडिया खातों को अवरुद्ध करने और निलंबित करने के कानूनी आधार पर सवाल उठाया है और दावा किया कि धारा 79(3)(बी) अधिकारियों को सूचना को अवरुद्ध करने का निर्देश देने के लिए शक्ति का स्रोत नहीं है।
याचिका में यह घोषणा करने का अनुरोध किया गया कि इस प्रावधान के तहत जारी किए गए सभी परिणामी निर्देश, नियम और अधिसूचनाएं, जहां तक वे सूचना को अवरुद्ध करने से संबंधित हैं, अमान्य हैं।
आम आदमी पार्टी (आप) ने कथित तौर पर अधिकारियों द्वारा पार्टी के सोशल मीडिया खातों को ब्लॉक या निलंबित करने के लिए जारी किए गए निर्देशों को रद्द करने का अनुरोध किया है।
भाषा प्रशांत धीरज
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