नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में चलती बस में नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म के मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए सोमवार को कहा कि ऐसी घटनाएं कानून प्रवर्तन प्राधिकारियों की व्यवस्थागत नाकामी को रेखांकित करती हैं।
न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि यह घटना 2012 के दर्दनाक निर्भया कांड की याद दिलाती है।
पीठ ने कहा, ‘‘दिल्ली-एनसीआर में दुष्कर्म की घटनाएं बुनियादी सुरक्षा मुहैया कराने में कानून प्रवर्तन और प्रशासनिक तंत्र की व्यवस्थागत नाकामी को उजागर करती हैं।’’
शीर्ष अदालत ने कहा कि पार्क और बसों समेत सार्वजनिक स्थानों को रोशनी, निगरानी और अन्य प्रशासनिक सुविधाओं की कमी के कारण अत्यधिक जोखिम वाले स्थान नहीं बनने दिया जा सकता।
ग्रेटर नोएडा से चार अगस्त को एक ‘स्लीपर बस’ में सवार हुई 16 वर्षीय लड़की से बस के चालक और परिचालक ने कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म किया और उसे करीब 40 किलोमीटर दूर पुरानी दिल्ली में कश्मीरी गेट के पास छोड़ दिया।
इस घटना ने दिल्ली में 2012 में हुए सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के निर्भया कांड की याद दिला दी।
भाषा खारी सिम्मी
सिम्मी